लखनऊ में बढ़ाई गई खाद्यान्न प्राप्ति की समयसीमा जनता की सुविधा और उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लखनऊ के भीतर राशन वितरण की अंतिम तारीख में उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। जिन लाभार्थियों को किन्हीं अपरिहार्य कारणों या व्यस्तताओं के चलते अपने हिस्से का गेंहू और चावल समय पर उठाने का अवसर नहीं मिल पाया था, वे अब बिना किसी परेशानी के बढ़ी हुई अवधि के दौरान अपनी खाद्यान्न सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। स्थानीय स्तर पर राशन की दुकानों और वितरण केंद्रों को इस संदर्भ में स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त हो चुके हैं ताकि किसी भी पात्र नागरिक को सामग्री प्राप्ति के दौरान अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। जिला प्रशासन और संबंधित खाद्य आपूर्ति विभाग ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि सभी अधिकृत विक्रेता निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी दुकानों को सुचारू रूप से संचालित रखें ताकि हर पंजीकृत उपभोक्ता अपनी तय मात्रा का गेंहू तथा चावल सुगमता से अपने घर ले जा सके। इस प्रकार की समयवृद्धि से उन परिवारों को बहुत बड़ा संबल प्राप्त हुआ है जो किसी आपात स्थिति अथवा अन्य गंभीर कारणों की वजह से शुरुआती तिथियों में अपनी दुकान तक नहीं पहुंच सके थे।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रक्रिया और पृष्ठभूमि सार्वजनिक वितरण प्रणाली हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए जीवन रेखा के समान कार्य करती है जिसके अंतर्गत हर महीने करोड़ों नागरिकों को रियायती दरों पर या मुफ्त में आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इस तंत्र का विस्तार बहुत व्यापक स्तर पर किया गया है जहां विभिन्न उचित दर की दुकानों के माध्यम से पात्र कार्डधारकों को गेंहू, चावल और अन्य जरूरी सामग्रियां बांटी जाती हैं। सामान्य तौर पर इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक निश्चित मासिक कलैंडर निर्धारित होता है जिसके दायरे में रहकर ही सभी डीलरों को अपना वितरण कार्य पूरा करना होता है। हालांकि कई बार तकनीकी समस्याओं, सर्वर की सुस्ती, बायोमीट्रिक सत्यापन में आने वाली बाधाओं या फिर व्यक्तिगत कारणों की वजह से कुछ नागरिक तय समयसीमा के भीतर अपनी सामग्री नहीं जुटा पाते हैं। ऐसे हालातों को देखते हुए समय-समय पर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जाती है और यदि आवश्यक हो तो वितरण की तारीखों को आगे बढ़ा दिया जाता है ताकि जनहित योजना का उद्देश्य किसी भी स्तर पर विफल न हो और हर जरूरतमंद व्यक्ति तक उसका निर्धारित हक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंच सके।
लाभार्थियों के लिए आगे के निर्देश और सुविधा बढ़ी हुई तारीखों का लाभ उठाने के लिए सभी संबंधित कार्डधारकों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम दिनों की भीड़भाड़ से बचने के लिए समय रहते अपनी नजदीकी राशन की दुकान पर संपर्क करें और अपना गेंहू तथा चावल प्राप्त कर लें। वितरण प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या फिर कोटेदार द्वारा आनाकानी किए जाने की स्थिति में उपभोक्ता सीधे संबंधित जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं जिसके लिए सरकार ने सुगम माध्यम भी उपलब्ध करा रखे हैं। आधुनिक तकनीक के इस दौर में ई-पॉश मशीनों के माध्यम से होने वाले सत्यापन के बाद ही खाद्यान्न सुपुर्द किया जाता है इसलिए उपभोक्ताओं को अपना आधार कार्ड और राशन कार्ड साथ रखना अनिवार्य होता है। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्यान्न वितरण में पूरी पारदर्शिता बनी रहे और लखनऊ के किसी भी कोने में रहने वाला कोई भी गरीब परिवार अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित न रह जाए। प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम से आम जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश गया है और लोग बिना किसी मानसिक तनाव के अपने हिस्से की राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए दुकानों का रुख कर रहे हैं।