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पौराणिक बदलाव: हनुमान अंश से लेकर कृष्ण की कहानी तक बॉलीवुड का नया रुख
भारतीय सिनेमा के गलियारों में आजकल पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी कहानियों का दौर तेजी से लौट रहा है, जिससे मनोरंजन जगत का पूरा परिदृश्य बदलता हुआ नजर आ रहा है।
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Ankit Yadav
11 सित 2026, 12:05
भारतीय फिल्म उद्योग में इन दिनों एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां फिल्म निर्माता और बड़े बैनर पश्चिमी प्रभावों को छोड़कर अपनी मूल संस्कृति और पौराणिक कथाओं की ओर रुख कर रहे हैं। 'हनुमान अंश' जैसी प्रस्तुतियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि दर्शक अब पारंपरिक और आध्यात्मिक विषयों पर आधारित सिनेमा को बेहद पसंद कर रहे हैं। इस बदलते ट्रेंड का असर सिर्फ छोटे प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यधारा के बड़े निर्माता भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं और अपनी आगामी फिल्मों के जरिए दर्शकों को भारतीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
करण जौहर भी ला रहे कृष्ण की गाथा
बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता करण जौहर भी इस सांस्कृतिक लहर से अछूते नहीं हैं और वह अब भगवान कृष्ण के जीवन और दर्शन पर आधारित एक भव्य कहानी को सिल्वर स्क्रीन पर लाने की तैयारी कर रहे हैं। इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स का एलान इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री अब पूरी तरह से माइथोलॉजिकल और ऐतिहासिक कंटेंट को प्राथमिकता दे रही है। मेकर्स का मानना है कि इस प्रकार की कहानियों में असीम संभावनाएं छिपी हैं, जो न केवल बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर सकती हैं, बल्कि दर्शकों के दिलों में एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य सांस्कृतिक केंद्रों में भी सिनेमा प्रेमियों के बीच इस बात की खासी चर्चा है कि क्या यह नया दौर आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूट रही युवा पीढ़ी को फिर से उनकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में कामयाब हो पाएगा। आज की जेन-जी पीढ़ी जो पश्चिमी संस्कृति और डिजिटल कंटेंट की आदि हो चुकी है, उसे अपनी जड़ों की ओर वापस लाने के लिए यह सिनेमाई प्रयास एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि यदि कहानियों को आधुनिक तकनीक और बेहतरीन वीएफएक्स के साथ आज के दौर के अनुकूल ढालकर पेश किया जाए, तो युवा दर्शक भी इसे खुले दिल से अपनाएंगे और अपनी महान परंपराओं को गहराई से समझ सकेंगे।
आने वाले समय में जब इस तरह की भारी-भरकम पौराणिक फिल्में सिनेमाघरों में दस्तक देंगी, तो यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बॉक्स ऑफिस का गणित किस करवट बैठता है और क्या यह बदलाव भारतीय फिल्म जगत के लिए एक स्थाई और दीर्घकालिक दिशा तय कर पाता है। फिल्म जगत से जुड़े जानकारों का यह भी कहना है कि इस ट्रेंड के आने से न केवल निर्देशकों और अभिनेताओं को लीक से हटकर काम करने का मौका मिल रहा है, बल्कि वीएफएक्स, पौराणिक अनुसंधान और पारंपरिक कलाओं से जुड़े तमाम कलाकारों के लिए भी रोजगार के नए और बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं।