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संगीत जगत का सच: श्रेया घोषाल ने खोले बॉलीवुड में महिला गायिकाओं के संघर्ष के पन्ने

बॉलीवुड की मशहूर पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल ने फिल्म संगीत उद्योग में व्याप्त पुरुष-प्रधान संस्कृति और लैंगिक असंतुलन पर खुलकर अपनी बात रखी है, जिससे एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

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Ankit Yadav
06 सित 2026, 14:36
संगीत जगत का सच: श्रेया घोषाल ने खोले बॉलीवुड में महिला गायिकाओं के संघर्ष के पन्ने
बॉलीवुड संगीत जगत की चमक-दमक के पीछे छिपी एक कड़वी सच्चाई हाल ही में तब उजागर हुई जब प्रसिद्ध गायिका श्रेया घोषाल ने शीर्ष पचास लोकप्रिय गानों में महिला गायिकाओं की बेहद कम संख्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने देश के संगीत बाजार में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और पुरुष कलाकारों के वर्चस्व पर तीखा प्रहार किया है। इस खुलासे के बाद से लखनऊ से लेकर मुंबई तक कला जगत और संगीत प्रेमियों के बीच गहरी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या आज भी मुख्यधारा के सिनेमा में महिला कलाकारों को उनका हक नहीं मिल रहा है।

शीर्ष गानों में न के बराबर महिला आवाजें

श्रेया घोषाल द्वारा सामने रखे गए आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे लोकप्रिय पचास गानों की सूची में बमुश्किल सात महिला गायिकाओं को स्थान मिल पाया है। यह चौंकाने वाला अनुपात इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किस प्रकार मनोरंजन उद्योग का एक बड़ा हिस्सा अब भी पुरुष गायकों को ही प्राथमिकता देता है। दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था के कारण नई महिला प्रतिभाओं को अपने लिए जगह बनाने में भारी संघर्ष का सामना करना पड़ता है। संगीत विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सूची का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी व्यवस्था में गहराई तक पैठ बना चुकी मानसिकता को दर्शाता है। लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या लोकप्रिय गीतों में विविधता और संतुलन लाने के लिए निर्माताओं और संगीत निर्देशकों को अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी संगीत कला से जुड़े लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आखिर क्यों महिला कलाकारों को मुख्यधारा के प्रोजेक्ट्स में कम मौके मिलते हैं। हालांकि महिला गायिकाओं ने अपने बेहतरीन कौशल से हमेशा श्रोताओं के दिलों पर राज किया है, फिर भी व्यावसायिक मंचों पर उन्हें समान प्रतिनिधित्व मिलना अभी भी बाकी है। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर सांस्कृतिक मंचों तक पर फिल्म निर्माताओं और संगीत कंपनियों की कार्यप्रणाली की आलोचना की जा रही है। जानकारों का कहना है कि अगर उद्योग को वाकई आधुनिक और समावेशी बनना है, तो इस प्रकार के लैंगिक असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस तीखी आलोचना के बाद बॉलीवुड के संगीतकार महिला गायिकाओं को अधिक अवसर देने के लिए अपनी नीतियों में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।
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