भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आज अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के परिणामों की घोषणा करते हुए देश के आम नागरिकों और उद्योग जगत को एक बड़ी राहत दी है। गवर्नर के नेतृत्व में हुई इस बैठक में रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इस फैसले से बैंकों के लिए धन की लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में कमी के रूप में मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा महंगाई दर के पिछले कुछ महीनों से रिजर्व बैंक के आरामदायक दायरे (2-6%) के भीतर बने रहने के कारण ही यह कदम उठाना संभव हो पाया है।
रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल की उम्मीद आरबीआई के इस निर्णय के तुरंत बाद शेयर बाजार के बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। जानकारों का कहना है कि ब्याज दरों में इस कटौती से रियल एस्टेट सेक्टर और ऑटोमोबाइल उद्योग को त्योहारी सीजन से पहले बड़ी ऑक्सीजन मिलेगी, क्योंकि सस्ते कर्ज के कारण बाजार में मांग तेजी से बढ़ेगी। देश के प्रमुख उद्योग संघों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला कदम बताया है।
मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों को मिलेगा संबल इस नीतिगत बदलाव से देश के एमएसएमई (MSME) सेक्टर को भी बेहद कम ब्याज दरों पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो सकेगी, जिससे रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। आरबीआई गवर्नर ने प्रेस को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक वैश्विक अनिश्चितताओं पर पैनी नजर बनाए हुए है और देश की वृहद आर्थिक स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। सरकार और केंद्रीय बैंक के इस समन्वित प्रयास से चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी विकास दर के मजबूत बने रहने का अनुमान जताया जा रहा है।