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बाजार में बड़ी गिरावट: अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे तेल से सेंसेक्स 374 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान पर बंद हुए।

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Ankit Yadav
03 सित 2026, 14:18
बाजार में बड़ी गिरावट: अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे तेल से सेंसेक्स 374 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे
भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन निवेशकों के लिहाज से काफी निराशाजनक रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी मोर्चे पर मची उथल-पुथल के बीच घरेलू निवेशकों की धारणा पर गहरा असर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की वित्तीय बाजारों को चिंता में डाल दिया है, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आग में घी का काम किया, जिससे निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना बेहतर समझा और ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू कर दी।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

सप्ताह के कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में जोरदार गोता देखने को मिला और यह कारोबार के अंत तक 374 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार की इस सुस्ती का असर सिर्फ सेंसेक्स तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। बिकवाली के इस दबाव के चलते निफ्टी 24,000 अंकों के अहम स्तर को पार करने में विफल रहा और उससे नीचे बंद हुआ। बाजार जानकारों का मानना है कि इस तरह के तीव्र उतार-चढ़ाव से आने वाले दिनों में निवेशकों की संपत्ति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है, क्योंकि वैश्विक कारक फिलहाल सकारात्मक संकेत नहीं दे रहे हैं। क्रूड ऑयल के दामों में उछाल आने से भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर आयात बिल का बोझ काफी बढ़ जाता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश में चालू खाते के घाटे और राजकोषीय स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंकाएं गहरा जाती हैं। घरेलू कंपनियों के मुनाफे पर भी लागत बढ़ने का दबाव साफ महसूस किया जा रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजारों की रिकवरी की उम्मीदों को फिलहाल के लिए झटका दे दिया है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू शेयर बाजार में इसी तरह की अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी तरह की जल्दबाजी में आकर निवेश से जुड़े बड़े फैसले लेने से बचें और लंबी अवधि के फंडामेंटल्स पर अधिक ध्यान केंद्रित करें। बाजार की चाल आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और विदेशी कोषों के रुख पर पूरी तरह निर्भर करेगी।
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