कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल में बाढ़ : चीन पर उठ रहे सवालों पर क्या कह रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया      भारत ने दो बार बुलाया, तारिक रहमान नहीं आए; विवाद के बावजूद बालेन शाह ने दिल्ली क्यों चुनी?      उत्तराखंड पर मंडराया खतरा, ग्लेशियरों के पिघलने से उच्च हिमालयी क्षेत्र में बनीं 77 नई झीलें      Raksha Bandhan 2026 Wishes: बड़े भाई से छोटे भाई तक, हर रिश्ते के लिए भेजें ये खास मैसेज, दिल में घुल जाएगा...      सोनिया गांधी पर किताब प्रकाशित नहीं करेगा पेंगुइन इंडिया, संपादकीय बदलाव से लेखिका का इनकार      Raksha Bandhan 2026: आज पूरे दिन पंचक, सुबह का मुहूर्त निकला, दोपहर में कब बांधें राखी?      अभिजीत दीपके ने अरविंद केजरीवाल को पछाड़ दिया! सर्वे में CJP चीफ ने चौंकाया      भारत खरीदेगा दुनिया का सबसे खतरनाक एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम 'जैवलिन', क्यों खास है ये अमेरिकी हथियार     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
व्यापार ब्रेकिंग

बड़ी चिंता का विषय: जेपी मॉर्गन ने 2027 में खाद्य और उर्वरक संकट की दी चेतावनी

वैश्विक वित्तीय संस्थान जेपी मॉर्गन ने आने वाले वर्षों को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसके तहत 2027 में दुनियाभर में खाद्य और उर्वरक संकट गहराने की आशंका जताई गई है।

X
Kantap News डेस्क
19 अग 2026, 11:53
बड़ी चिंता का विषय: जेपी मॉर्गन ने 2027 में खाद्य और उर्वरक संकट की दी चेतावनी
दुनियाभर के बाजारों पर नजर रखने वाले प्रमुख वित्तीय संस्थान जेपी मॉर्गन ने एक रिपोर्ट जारी कर आगाह किया है कि वर्ष 2027 तक वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की भारी कमी देखने को मिल सकती है। इस आसन्न संकट का असर न केवल विकसित देशों बल्कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर भी बहुत गहरा पड़ेगा, जिसमें भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि आपूर्ति श्रृंखला में लगातार आ रही बाधाओं, भू-राजनीतिक तनावों और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो दुनिया भर में खाद्यान्न की कीमतें आसमान छू सकती हैं और करोड़ों लोगों के लिए पोषण संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए इस चेतावनी को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि देश की एक बहुत बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करती है। उर्वरकों के आयात और उनकी बढ़ती लागत का सीधा असर देश के किसानों और उनकी उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे अंततः खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू स्तर पर उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, फिर भी वैश्विक संकट के प्रभाव से पूरी तरह बचना एक बड़ी चुनौती होगी। नीति निर्माताओं के लिए यह समय भविष्य की रणनीतियों पर पुनर्विचार करने और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए और अधिक संसाधन जुटाने का है।

निवारक उपायों की सख्त जरूरत

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस संभावित संकट से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करना होगा, जैसे कि सटीक कृषि और जैविक उर्वरकों का प्रोत्साहन। इसके अलावा, सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर कृषि आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बनाना होगा ताकि किसी भी बाहरी झटके का असर आम जनता तक न पहुंचे। देश के किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक और बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा ताकि खाद्यान्न का उत्पादन किसी भी स्थिति में बाधित न हो। यदि भारत इन चुनौतियों का सामना सही समय पर सही नीतियों के साथ कर लेता है, तो वह इस वैश्विक संकट के नकारात्मक प्रभावों से अपने नागरिकों को बचाने में पूरी तरह सफल रहेगा।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज