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हस्तशिल्प उद्योग को संजीवनी: असम की पारंपरिक बांस की घड़ियों ने वैश्विक बाजार में मचाई धूम

असम के ग्रामीण कारीगरों द्वारा बांस और बेंत से तैयार की गई आधुनिक डिजाइनों की दीवार घड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग पैदा कर दी है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:31
हस्तशिल्प उद्योग को संजीवनी: असम की पारंपरिक बांस की घड़ियों ने वैश्विक बाजार में मचाई धूम
पूर्वोत्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प को एक नया वैश्विक मंच प्रदान करते हुए असम के कामरूप जिले के कारीगरों ने बांस से बनी घड़ियों का एक अनूठा संग्रह तैयार किया है। इन उत्पादों ने जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेलों में खरीदारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। स्थानीय कारीगरों ने पारंपरिक बुनाई कला को आधुनिक समय की मांग के साथ इस तरह जोड़ा है कि प्रत्येक घड़ी एक उत्कृष्ट कलाकृति बन जाती है। इस पहल से न केवल राज्य के सैकड़ों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार मिला है, बल्कि पारंपरिक कुटीर उद्योग को भी एक नई आर्थिक मजबूती प्राप्त हुई है।

पारंपरिक कला और आधुनिक डिजाइन का संगम

इन घड़ियों के निर्माण में पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें सिंथेटिक रंगों की जगह प्राकृतिक वनस्पति रंगों को प्राथमिकता दी गई है। जिला प्रशासन और खादी बोर्ड के संयुक्त प्रयासों से कारीगरों को बेहतर डिजाइनिंग टूल्स और वैश्विक विपणन का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर रही है। प्रत्येक घड़ी पर असम की लोक संस्कृति और वन्यजीवों की खूबसूरत नक्काशी की जाती है, जो विदेशियों को बहुत आकर्षित करती है। इस व्यवसाय के बढ़ने से स्थानीय युवाओं का पलायन भी रुका है और वे अपने पैतृक कौशल को आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं।

आर्थिक लाभ और भविष्य का रोडमैप

निर्यात आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक तिमाही में ही इन बांस की घड़ियों के निर्यात से करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की गई है। सरकार अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों को भी इसमें शामिल करने की योजना बना रही है ताकि इस क्षेत्र को एक बड़ा विनिर्माण केंद्र बनाया जा सके। अगले महीने गुवाहाटी में एक विशेष वैश्विक खरीदार-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के बड़े ब्रांड्स हिस्सा लेंगे। इससे असम के हस्तशिल्प उत्पादों को और अधिक व्यापक बाजार मिलने की पूरी उम्मीद है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा.
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