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राहत और चिंता: जुलाई में थोक महंगाई घटकर 9.78% हुई, लेकिन खाद्य पदार्थों के दाम चढ़े

देश के आर्थिक मोर्चे पर जुलाई महीने के लिए थोक महंगाई दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि आम जनता की थाली पर महंगाई की मार अभी भी बनी हुई है।

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Kantap News डेस्क
15 अग 2026, 12:17
राहत और चिंता: जुलाई में थोक महंगाई घटकर 9.78% हुई, लेकिन खाद्य पदार्थों के दाम चढ़े
भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जुलाई के महीने में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में मामूली नरमी देखने को मिली है। इससे पिछले महीने यानी जून में यह दर 9.87 प्रतिशत पर थी, जो अब सुधरकर 9.78 प्रतिशत पर आ गई है। इस हल्की सी गिरावट के पीछे मुख्य तौर पर ऊर्जा क्षेत्र, विशेषकर ईंधन और बिजली के मोर्चे पर मिली मामूली राहत को वजह माना जा रहा है, जिससे सूचकांक को थोड़ा संबल मिला है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं

थोक महंगाई के आंकड़ों में भले ही कुल मिलाकर मामूली कमी आई हो, लेकिन आम उपभोग से जुड़ी खाने-पीने की वस्तुएं अभी भी महंगी बनी हुई हैं। सब्जियों, अनाजों और अन्य खाद्य उत्पादों के दाम ऊंचे बने रहने के कारण बाजार में उपभोक्ताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जानकारों का मानना है कि ईंधन सेक्टर में राहत मिलने के बावजूद खाद्य महंगाई का ग्राफ ऊपर की ओर रहना नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार और आर्थिक विश्लेषकों की नजरें अब आने वाले महीनों में महंगाई के रुख पर टिकी हुई हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक रसोई के जरूरी सामानों की कीमतों में व्यापक स्तर पर गिरावट दर्ज नहीं की जाती, तब तक आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर पूरी तरह से राहत मिलने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
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