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शानदार बढ़त: बिहार के मखाना ने 20 से अधिक देशों में बनाई खास पहचान, उत्पादन में दुनिया भर में आगे
बिहार का मखाना वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है। दुनिया भर में इसके कुल उत्पादन का 85 फीसदी हिस्सा अकेले बिहार से आता है, और इसके मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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Ankit Yadav
23 अग 2026, 11:20
भारतीय कृषि और स्थानीय उत्पादों के लिए यह एक बेहद सुखद और गर्व का विषय है कि बिहार का मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है। कृषि उत्पादों की श्रृंखला में इसे एक सुपरफूड के रूप में देखा जाने लगा है, जिसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुनाफे में 18 फीसदी तक की उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है, जिससे स्थानीय किसानों और व्यापारियों में काफी उत्साह का माहौल है। यह आर्थिक सुधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है और पारंपरिक खेती से हटकर लाभकारी कृषि की ओर एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।
वैश्विक बाजार में बढ़ता दबदबा
बिहार का मखाना केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी अपनी धाक जमा रहा है। वर्तमान स्थिति यह है कि यह पौष्टिक उत्पाद दुनिया के 20 से अधिक देशों में अपनी पहुंच बना चुका है। विदेशी बाजारों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85 फीसदी हिस्सा अकेले बिहार राज्य से ही आता है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं छिपी हुई हैं और यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झंडे गाड़ सकते हैं। राज्य के किसानों की मेहनत और पारंपरिक ज्ञान ने इस मखाने को ग्लोबल मार्केट का एक अनमोल हिस्सा बना दिया है।
पारंपरिक रूप से मखाना निकालने और उसकी प्रोसेसिंग करने का काम काफी कठिन और श्रमसाध्य माना जाता था, लेकिन आधुनिक तकनीकों के आने और सरकार द्वारा मिल रहे समर्थन से इस प्रक्रिया में काफी सुधार हुआ है। किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और सही मूल्य मिलने के कारण उनके आर्थिक स्तर में सुधार आ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मखाने की मांग और अधिक तेजी से बढ़ेगी, जिससे निर्यात के नए द्वार खुलेंगे।
इस सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन मिलकर मखाने की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात को और अधिक बढ़ावा दें, तो यह आंकड़ा और भी ऊंचे स्तर पर पहुंच सकता है। विदेशी बाजारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच मखाने को एक बेहतरीन स्नैक के रूप में पसंद किया जा रहा है। कुल मिलाकर, बिहार के मखाने की यह सफलता न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के कृषि व्यापार के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रही है।