आज भारतीय शेयर बाजार के लिए काला दिन साबित हुआ। सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों ने नीचे की ओर गोता लगा दिया। निफ्टी 50 ने 450 अंकों की गिरावट के साथ 24,100 के स्तर को भी तोड़ दिया। बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा बड़ी मात्रा में पूंजी निकालने से यह स्थिति पैदा हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर संकेत के कारण निवेशकों में घबराहट साफ देखी गई। बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों के लिए चेतावनी बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि यह बिकवाली केवल एक अस्थायी सुधार हो सकता है, लेकिन निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है। म्युचुअल फंड उद्योग के विशेषज्ञों ने भी सलाह दी है कि घबराहट में शेयर बेचने के बजाय अपने पोर्टफोलियो को विविधतापूर्ण बनाए रखना बेहतर है। आज सबसे ज्यादा नुकसान टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों को हुआ। कारोबार के अंत तक बाजार में थोड़ी रिकवरी के संकेत दिखे, लेकिन सेंटिमेंट अभी भी कमजोर बना हुआ है। खुदरा निवेशकों के बीच यह डर है कि क्या यह गिरावट लंबे समय तक चलेगी।
वैश्विक कारकों का प्रभाव वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। इसके अलावा, एशिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा, जिससे भारतीय बाजार की स्थिति और बिगड़ गई। वित्त मंत्रालय ने हालांकि स्पष्ट किया है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना मजबूत है और विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहेगा। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आने वाले तिमाही नतीजों से बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है। आज के सत्र में 1800 से अधिक शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही तेजी देखी गई।