बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.75 प्रतिशत करने के फैसले ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। बाजार खुलने के साथ ही सेंसेक्स ने 700 अंकों की गिरावट दर्ज की और निफ्टी 21,500 के स्तर से नीचे फिसल गया। बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, क्योंकि महंगी ईएमआई का सीधा असर आम उपभोक्ताओं और कॉरपोरेट कर्ज पर पड़ने की आशंका है।
निवेशकों के लिए बाजार का रुख विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह गिरावट अल्पकालिक है, क्योंकि आरबीआई ने भविष्य के लिए 'समायोजन' रुख के संकेत भी दिए हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अनिश्चितता के कारण घरेलू निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने आज के सत्र में करीब 1,200 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे घबराहट में कोई निर्णय न लें और लंबी अवधि के लिए मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करें।
अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना आरबीआई की पहली प्राथमिकता है। अगले दो तिमाहियों तक ब्याज दरें उच्च रहने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 प्रतिशत के आसपास बनी रहने का अनुमान है, जो वैश्विक मंदी के बीच एक सकारात्मक संकेत है। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे खर्च से आने वाले समय में आर्थिक रिकवरी को गति मिल सकती है।