गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आबिद, सलमान, अरमान, अफरोज और देशरत्न के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। बरामदगी के आधार पर पुलिस गिरोह के नेटवर्क और उसके काम करने के तरीके की विस्तृत जांच कर रही है।
ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा
एसपी नार्थ मुकेश चंद मिश्रा के मुताबिक, एक मुकदमे की जांच के दौरान पुलिस को इस गिरोह की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ने पर कथित तौर पर फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार करने और सरकारी योजना का लाभ गलत तरीके से लेने का मामला सामने आया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य जरूरतमंद लोगों को योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने का लालच देते थे। इसके बदले उनसे पैसे लेने के साथ आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज हासिल किए जाते थे। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर बदलाव कर फर्जी लाभार्थियों के नाम से आयुष्मान कार्ड तैयार किए जाते थे।
अस्पतालों की भूमिका की भी जांच
पुलिस का दावा है कि गिरोह के सदस्य कुछ अस्पतालों से कथित मिलीभगत कर फर्जी लाभार्थियों का इलाज दिखाते थे और इसके आधार पर सरकारी योजना से धन हासिल करते थे। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और सरकारी धन का कितना दुरुपयोग किया गया।
बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद
भोजीपुरा पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 फर्जी आयुष्मान कार्ड, सात एंड्रॉयड मोबाइल फोन, छह फर्जी आधार कार्ड, 22 वर्क-कटिंग की छायाप्रति राशन कार्ड और 2,700 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस इन दस्तावेजों और मोबाइल फोन में मौजूद जानकारी की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल पांचों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी कार्ड के जरिए कितने लोगों को लाभार्थी दिखाया गया और सरकारी स्वास्थ्य योजना से कितनी धनराशि निकाली गई। जांच पूरी होने के बाद मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।