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सावधान: साइबर ठगी में बैंक खातों के दुरुपयोग पर पुलिस और एजेंसियों की सख्त निगरानी

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच कई राज्यों की पुलिस सामान्य बैंक खातों को म्यूल खाते बनाकर इस्तेमाल किए जाने की जांच कर रही है।

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Ankit Yadav
20 अग 2026, 16:30
साइबर ठगी में बैंक खातों के दुरुपयोग पर पुलिस की निगरानी बढ़ी

साइबर ठगी में बैंक खातों के दुरुपयोग पर पुलिस की सख्त निगरानी: 'म्यूल अकाउंट्स' पर कसी नकेल

देशभर में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) जैसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने बैंक खातों के दुरुपयोग पर चौतरफा निगरानी बढ़ा दी है। साइबर अपराधी अक्सर आम लोगों, छात्रों या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग विवरण ले लेते हैं। इन फर्जी खातों, जिन्हें तकनीकी भाषा में 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) कहा जाता है, का इस्तेमाल ठगी का पैसा घुमाने और निकालने के लिए किया जा रहा है।

एआई तकनीक और रियल-टाइम एक्शन से अपराधियों पर कसता शिकंजा

गृह मंत्रालय के 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) और राज्य पुलिस बलों ने बैंकिंग सेक्टर के साथ मिलकर इस सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी कदम उठाए हैं।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटो-ब्लॉकिंग: रिजर्व बैंक और बैंकों के समन्वय से ऐसे खातों की पहचान की जा रही है जिनमें अचानक बिना किसी पुराने वित्तीय इतिहास के भारी मात्रा में लेन-देन होने लगता है। ऐसे संदिग्ध खातों को ऑटोमैटिक सिस्टम से तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है।

  • साइबर हेल्पलाइन 1930 की रियल-टाइम मैपिंग: जब भी कोई पीड़ित 1930 पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराता है, तो पुलिस का सिस्टम बिना किसी देरी के उस खाते से जुड़े अन्य सभी 'लेयर खातों' को पहचानकर रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोक देता है।

  • फर्जी कंपनियों (Shell Companies) के करंट अकाउंट्स पर रेड: ठगों द्वारा खोली गई कागजी कंपनियों और संदिग्ध पेमेंट गेटवे का ब्योरा निकालकर पुलिस सीधे छापेमारी कर रही है और इनके कर्ता-धर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है।

खाताधारक ध्यान दें: किराए पर खाता देना अब सीधे जेल का रास्ता

पुलिस प्रशासन ने नागरिकों को सख्त चेतावनी जारी की है कि यदि उनके नाम पर पंजीकृत बैंक खाते का इस्तेमाल किसी भी साइबर अपराध या अवैध लेन-देन में पाया जाता है, तो उन्हें भी इस अपराध का बराबर का भागीदार माना जाएगा।

  • कानूनी कार्रवाई: अपना खाता, आधार विवरण, यूपीआई पिन या पासबुक किसी अनजान व्यक्ति को देना या किराए पर उठाना गैर-कानूनी है। इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की धाराओं के तहत पुलिस सीधे गिरफ्तारी कर सकती है।

  • सिविल रिकॉर्ड पर असर: जिस व्यक्ति का नाम साइबर फ्रॉड से जुड़े खाते में आता है, उसका सिबिल (CIBIL) स्कोर तो खराब होता ही है, साथ ही उसका नाम वित्तीय अपराधियों की ब्लैकलिस्ट में दर्ज होने से भविष्य में कोई भी बैंक खाता खोलना या लोन लेना असंभव हो जाता है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है

  1. पैसों के कमीशन के लालच में कभी भी अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या यूपीआई क्रेडेंशियल किसी अन्य व्यक्ति को न सौंपें।

  2. किसी भी संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

Tags: India
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