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दुबई में शिक्षा: क्या खाड़ी देश में चलती हैं सीबीएसई और आईसीएससी जैसी भारतीय बोर्ड की पढ़ाई
दुबई में रहने वाले और वहां बसने की योजना बनाने वाले भारतीय परिवारों के लिए बच्चों की स्कूली शिक्षा को लेकर कई सवाल मन में रहते हैं। खास तौर पर क्या वहां भारत के प्रमुख बोर्ड जैसे सीबीएसई और आईसीएससी की पढ़ाई का विकल्प मिलता है या नहीं, इस पर लगातार चर्चा होती रहती है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 13:33
विदेशों में खासतौर पर खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों की संख्या काफी अधिक है और इनमें उत्तर प्रदेश तथा लखनऊ जैसे शहरों से जाकर वहां काम करने वाले परिवार भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। जब बात बच्चों के भविष्य और उनकी पढ़ाई की आती है, तो अभिभावक हमेशा ऐसे संस्थानों की तलाश करते हैं जो भारतीय पाठ्यक्रम के अनुकूल हों। दुबई जैसे वैश्विक शहर में इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए कई तरह के शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि बच्चों को देश लौटने पर किसी प्रकार की अडचन का सामना न करना पड़े।
दुबई में भारतीय पाठ्यक्रम की उपलब्धता
दुबई में केवल स्थानीय या पश्चिमी शिक्षण प्रणालियां ही नहीं, बल्कि भारतीय मानकों के अनुसार चलने वाले बेहतरीन स्कूल भी संचालित होते हैं। इन संस्थानों में मुख्य रूप से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के नियमों का पालन किया जाता है, जिससे पाठ्यक्रम की निरंतरता बनी रहती है। जो परिवार लखनऊ या देश के अन्य हिस्सों से दुबई जाते हैं, वे अपने बच्चों का दाखिला इन विद्यालयों में आसानी से करवा सकते हैं, क्योंकि यहां पढ़ाई का माध्यम और पैटर्न काफी हद तक भारत जैसा ही होता है।
इसके अलावा, विभिन्न अन्य बोर्डों के विकल्प भी वहां की शैक्षिक प्रणाली में तलाशे जाते हैं ताकि छात्रों की व्यक्तिगत क्षमताओं का पूरा विकास हो सके। हालांकि, सीबीएसई पाठ्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में सबसे अधिक विश्वास देखा जाता है, क्योंकि इसकी किताबें और परीक्षा संरचना भारत के मुख्य राज्यों के स्कूलों से मेल खाती है। लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से आने वाले छात्र जब इन विदेशी परिसरों में दाखिला लेते हैं, तो उन्हें तालमेल बिठाने में ज्यादा कठिनाई महसूस नहीं होती।
अभिभावकों के लिए सही विकल्प का चुनाव
दुबई जाने वाले माता-पिता के सामने यह एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है कि वे अपने बच्चों के लिए किस प्रकार के स्कूल का चयन करें। वहां कई प्रकार के अंतरराष्ट्रीय स्कूल भी मौजूद हैं जो आईबी या ब्रिटिश पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और आगे चलकर उच्च शिक्षा के लिए भारतीय बोर्ड का महत्व अपनी जगह कायम है। यही वजह है कि खाड़ी देशों के प्रशासन और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से कई मान्यता प्राप्त शाखाएं वहां सफलतापूर्वक चल रही हैं।
आने वाले समय में इन विकल्पों के और अधिक विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे प्रवासी भारतीयों को अपनी पसंद की शिक्षा प्रणाली चुनने में और आसानी होगी। लखनऊ और यूपी के उन तमाम परिवारों के लिए जो दुबई में बसने या अस्थायी तौर पर रहने का विचार कर रहे हैं, यह जानकारी काफी राहत देने वाली है कि उनके बच्चे अपनी परिचित शिक्षा पद्धति के साथ ही विदेशी धरती पर भी आगे बढ़ सकते हैं।