देश का पहला ओटीटी प्रयोग
भारत में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की शुरुआत वैश्विक स्तर से काफी बाद में हुई। जबकि दुनिया भर में नेटफ्लिक्स का प्रभाव 1997 से ही शुरू हो गया था, भारत ने इस दिशा में अपना पहला बड़ा कदम साल 2008 में उठाया। रिलायंस एंटरटेनमेंट ने बिग फ्लिक्स (BigFlix) के नाम से अपना ओटीटी प्लेटफॉर्म देश के सामने पेश किया। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल माध्यम से दर्शकों तक फिल्में पहुंचाना था। मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने उस समय के हिसाब से काफी आधुनिक फीचर्स इसमें शामिल किए थे। इस प्लेटफॉर्म पर वीडियो ऑन डिमांड और मूवी ऑन डिमांड जैसी सुविधाएं दी गई थीं। शुरुआत के समय ही इसमें हिंदी, पंजाबी, बंगाली, तमिल और तेलुगु जैसी 9 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में 2,000 से ज्यादा एचडी फिल्मों का संग्रह उपलब्ध कराया गया था। इसका डिजाइन विशेष रूप से भारतीय दर्शकों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
असफलता के पीछे का गणित
बिग फ्लिक्स के बाजार में न टिक पाने के कई ठोस कारण थे। सबसे बड़ी बाधा भारत में उस समय उपलब्ध इंटरनेट की धीमी गति थी। साल 2008 से 2012 के बीच देश में 2जी और 3जी का जमाना था, जहां एक सामान्य वीडियो चलाना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। डेटा पैक भी काफी महंगे थे, जिससे लोग इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करते थे। कंपनी ने धर्मा प्रोडक्शंस, डिज्नी, राजश्री प्रोडक्शंस और वायाकॉम18 जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ फिल्मों के डिजिटल अधिकार खरीदने के लिए भारी-भरकम सौदे किए थे। बावजूद इसके, प्लेटफॉर्म पर ओरिजिनल कंटेंट की भारी कमी थी। कंपनी ने इसे 2017 में केवल 50 रुपये के सब्सक्रिप्शन शुल्क के साथ एक आधुनिक रूप में दोबारा भी लॉन्च किया था, लेकिन तब तक नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे वैश्विक दिग्गज भारतीय बाजार में पूरी तरह अपनी पकड़ बना चुके थे, जिनके सामने बिग फ्लिक्स टिक नहीं सका।
बाजार में बदलाव और भविष्य
बिग फ्लिक्स का अनुभव साबित करता है कि किसी भी तकनीकी क्रांति के लिए सही समय का होना अत्यंत आवश्यक है। रिलायंस ने इसे एक बेहतरीन आइडिया के रूप में पेश किया था, लेकिन बाजार की तैयारी उस समय पूरी नहीं थी। बाद के वर्षों में रिलायंस ने जियो एंटरटेनमेंट और जियो सिनेमा के माध्यम से अपनी किस्मत फिर आजमाई। कंपनी ने डिजिटल मनोरंजन के क्षेत्र में अपनी धाक जमाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखे। लंबे संघर्ष और बाजार की जरूरतों को समझने के बाद रिलायंस ने अंततः जियो हॉटस्टार के नाम से अपना ओटीटी पेश किया। आज जियो हॉटस्टार भारत में सबसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है। पहले प्रयास की असफलता ने रिलायंस को यह सिखाया कि तकनीक के साथ-साथ सही समय और ग्राहकों की बदलती पसंद को समझना भी कितना महत्वपूर्ण है। आज यह प्लेटफॉर्म बड़े स्तर पर दर्शकों को सेवा प्रदान कर रहा है।