कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो      ‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!      ‘भारत हम सभी के लिए उम्मीद की किरण’, पोलैंड के प्रधानमंत्री ने की PM मोदी की जमकर तारीफ     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
मनोरंजन

दिलचस्प इतिहास: पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के गानों से बहुत पहले कैसा था बिहार का 'ऑर्केस्ट्रा डांस', जानिए शुरुआत की कहानी

बिहार की सांस्कृतिक विरासत में लोक कलाओं का एक अलग स्थान है, जिसमें ऑर्केस्ट्रा डांस का इतिहास भी काफी पुराना और दिलचस्प रहा है। आज भले ही यह आधुनिक भोजपुरी गानों और डीजे की धुनों पर चलता हो, लेकिन इसके शुरुआती दिनों का स्वरूप काफी अलग था।

A
Ankit Yadav
04 सित 2026, 16:50
दिलचस्प इतिहास: पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के गानों से बहुत पहले कैसा था बिहार का 'ऑर्केस्ट्रा डांस', जानिए शुरुआत की कहानी
बिहार की संस्कृति और लोक मनोरंजन की दुनिया में ऑर्केस्ट्रा डांस का एक बहुत बड़ा और पुराना इतिहास रहा है। वर्तमान दौर में जब लोग भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार्स जैसे पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के गानों पर थिरकते हैं, तो यह सोचना मुश्किल हो जाता है कि आधुनिकता के इस दौर से कई दशक पहले यह कला किस रूप में मौजूद थी। जानकारों के अनुसार, आज का ऑर्केस्ट्रा अपने प्रारंभिक स्वरूप से काफी बदल चुका है और इसके विकास की कहानी काफी रोमांचक और दिलचस्प है।

लोक मनोरंजन का पारंपरिक साधन

बिहार के ग्रामीण इलाकों में शादियों, त्योहारों और विभिन्न उत्सवों के दौरान मनोरंजन के लिए पारंपरिक कलाओं का इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ-साथ इन आयोजनों का दायरा बढ़ा और नृत्य-संगीत आधारित कार्यक्रमों ने अपनी एक अलग जगह बना ली। शुरुआती दौर में ऑर्केस्ट्रा आज के मुकाबले काफी अलग और सीमित संसाधनों के साथ आयोजित किए जाते थे। कलाकारों का जीवन भी संघर्षपूर्ण होता था और वे अपनी कला के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों का मनोरंजन करते थे। आधुनिक तकनीक, साउंड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आने से पहले इस कला का स्वरूप पूरी तरह से पारंपरिक लोक शैली पर आधारित हुआ करता था। जैसे-जैसे समय बीतता गया और तकनीक में बदलाव आया, इस क्षेत्र में भी कई बड़े परिवर्तन देखने को मिले। कैसेट और सीडी के दौर से होते हुए यह आज डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के युग तक पहुंच चुका है। पवन सिंह, खेसारी लाल यादव और अन्य प्रसिद्ध गायकों के आने के बाद भोजपुरी गानों की लोकप्रियता पूरे देश और दुनिया में फैल गई, जिसके कारण ऑर्केस्ट्रा डांस में भी उन्हीं गानों की प्रधानता हो गई। आज के समय में अधिकांश आयोजनों में इन्हीं लोकप्रिय कलाकारों के गानों का उपयोग किया जाता है, जिससे इस विधा का पूरा चेहरा ही बदल गया है। इस बदलाव के बावजूद, इसके पुराने इतिहास और शुरुआती दिनों की जड़ों को लेकर लोगों में हमेशा से उत्सुकता बनी रही है। बुजुर्गों और लोक कला के जानकारों का मानना है कि यदि इस कला के शुरुआती दौर के संघर्षों और इसके विकास क्रम को गहराई से समझा जाए, तो यह बिहार के सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव का एक बेहतरीन आईना साबित होगा। आज भी कई लोग इसके पारंपरिक और पुराने स्वरूप को याद करते हैं और इसके ऐतिहासिक सफर के बारे में जानने की इच्छा रखते हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज