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कमजोर राइटिंग: यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक चार साल के लंबे इंतजार के बाद भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह था, लेकिन कमजोर पटकथा और खराब लेखन ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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Ankit Yadav
27 अग 2026, 10:43
साउथ सिनेमा के जाने-माने सुपरस्टार यश की मचअवेटेड फिल्म 'टॉक्सिक' हाल ही में रिलीज हुई है, जिसे लेकर फैंस के बीच पिछले चार साल से जबरदस्त उत्साह और क्रेज बना हुआ था। इस फिल्म से दर्शकों और समीक्षकों को बहुत बड़ी उम्मीदें थीं, क्योंकि यश का पिछला काम बेहद शानदार रहा था और उनके फैंस इस प्रोजेक्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सिनेमाघरों में फिल्म देखने के बाद दर्शकों की प्रतिक्रियाएं कुछ और ही बयां कर रही हैं। फिल्म का निर्देशन और विजुअल भले ही अपनी तरफ आकर्षित करते हों, लेकिन इसकी कमजोर राइटिंग ने पूरी फिल्म के प्रभाव को फीका कर दिया है।
कमजोर पटकथा ने बिगाड़ा खेल
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी और संवाद लेखन साबित हुए हैं। चार साल के लंबे इंतजार के बाद जब दर्शक बड़े पर्दे पर इस फिल्म को देखने पहुंचे, तो उन्हें एक मजबूत और कसी हुई कहानी की उम्मीद थी। इसके विपरीत, स्क्रीनप्ले में कई तरह की कमियां और झोल नजर आए, जो कहानी को आगे बढ़ाने में पूरी तरह असफल रहे। किरदारों का विकास ठीक से नहीं किया गया था और संवाद भी काफी साधारण थे, जिसकी वजह से दर्शकों का जुड़ाव फिल्म के मुख्य भावनात्मक पलों के साथ नहीं हो पाया। एक बड़े बजट की और बहुचर्चित फिल्म से जैसी उम्मीद की जाती है, उस पैमाने पर लेखन खरा नहीं उतर सका।
फिल्म समीक्षकों का भी यही मानना है कि यदि इस प्रोजेक्ट पर लेखन के स्तर पर थोड़ा और अधिक काम किया जाता, तो यह बॉक्स ऑफिस पर एक ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर साबित हो सकती थी। यश जैसे करिश्माई अभिनेता की स्क्रीन प्रेजेंस और उनके एक्शन अवतार के बावजूद, कहानी में गहराई न होने के कारण फिल्म का प्रभाव सीमित रह गया। सिनेमा प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि चार साल का लंबा समय बिताने के बाद ऐसी कमजोर पटकथा देखना उनके लिए काफी निराशाजनक अनुभव रहा है।
भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर असर और सीख
किसी भी बड़ी फिल्म की सफलता के लिए एक मजबूत पटकथा का होना कितना जरूरी है, 'टॉक्सिक' का यह उदाहरण फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सबक बनकर सामने आया है। निर्माताओं और निर्देशकों को यह समझना होगा कि केवल स्टार पावर और भव्य सेट दर्शकों को लंबे समय तक सिनेमाघरों से जोड़े नहीं रख सकते, जब तक कि कहानी में दम न हो। यश के फैंस अब उम्मीद कर रहे हैं कि अपने आगामी प्रोजेक्ट्स में वे स्क्रिप्ट के चुनाव पर और अधिक ध्यान देंगे, ताकि उनके अभिनय का पूरा फायदा फिल्म को मिल सके और दर्शकों को एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव प्राप्त हो सके।