देवराहा बाबा के जीवन पर नई सिनेमाई प्रस्तुति
रहस्यमयी संत देवराहा बाबा के जीवन दर्शन को अब बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है। फिल्म का शीर्षक मचान बाबा रखा गया है और इसका आधिकारिक पोस्टर भी सार्वजनिक कर दिया गया है। फिल्म का निर्माण ओजस फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है, जो ओजस सॉफ्टेक कंपनी का कंटेंट और फिल्म निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। निर्माता के तौर पर पूनम गुप्ता ओबीई और उद्यमी विकल्प पालीवाल इस परियोजना को संभाल रहे हैं। इस फिल्म की रिलीज के लिए वर्ष 2027 का समय निर्धारित किया गया है। यह घोषणा नीब करौरी बाबा के जीवन से प्रेरित हनुमान अंश नामक फिल्म की उल्लेखनीय सफलता के बाद की गई है। फिल्म की पटकथा में बाबा के चमत्कारों के साथ-साथ उनके जीवन से जुड़े आस्था, इतिहास, राजनीति और रहस्यों के पहलुओं को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इससे पहले भी कई आध्यात्मिक व्यक्तित्वों पर आधारित फिल्में बनी हैं, लेकिन इस फिल्म के जरिए दर्शकों को बाबा के व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं के बारे में व्यापक जानकारी मिलने की संभावना है।
बिहार और झारखंड से जुड़ा गहरा आध्यात्मिक संबंध
संत देवराहा बाबा का बिहार और झारखंड के क्षेत्रों से बेहद गहरा और पुराना नाता रहा है। इन दोनों राज्यों में आज भी बाबा के अनुयायियों की संख्या काफी अधिक है। झारखंड के गुमला जिले में स्थित पालकोट क्षेत्र इस फिल्म के शोध का एक मुख्य और दिलचस्प आधार बना है। श्री देवराहा बाबा लीला दर्शन के माध्यम से यह पता चलता है कि पालकोट के तत्कालीन राजपरिवार के साथ बाबा के संबंध बेहद मधुर थे। बाबा के वहां आगमन के दौरान उनके योग और साधना के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी और एक अलग स्थान निर्मित किया गया था। पालकोट और रांची के आसपास के क्षेत्रों में बाबा की कायाकल्प साधना से जुड़ी अनेक रोचक और लोकप्रिय कथाएं आज भी सुनाई जाती हैं। फिल्म का शोध कार्य इन जनश्रुतियों और क्षेत्रीय ऐतिहासिक संदर्भों को पूरी तरह से समाहित करने पर केंद्रित है। बिहार और झारखंड में बाबा से जुड़ी इन स्मृतियों को एक साथ पिरोकर फिल्म में दर्शाया जाएगा ताकि बाबा की व्यापकता और उनके प्रभाव को पूरी तरह से समझा जा सके।
पूर्व राष्ट्रपति के साथ जुड़ा ऐतिहासिक संदर्भ
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद का देवराहा बाबा के प्रति विशेष सम्मान और आस्था का भाव हमेशा बना रहा। विभिन्न दस्तावेजों और ऐतिहासिक वृत्तांतों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद का बाबा के साथ गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव था। उन्होंने बचपन के दिनों में ही बाबा के दर्शन किए थे और बाद के वर्षों में भी उनका बाबा से संपर्क बना रहा। यह ऐतिहासिक कड़ी फिल्म के कथानक को और अधिक प्रामाणिक बनाने में सहायक होगी। फिल्म केवल बाबा के चमत्कारों तक सीमित नहीं रहकर उनके जीवन के विविध आयामों पर प्रकाश डालेगी। यह फिल्म बिहार, झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में बाबा के प्रवास और वहां के लोगों के साथ उनके संबंधों को एक साथ लाकर पेश करेगी। शोधकर्ताओं ने बाबा के इतिहास और राजनीति से जुड़े उन प्रसंगों को भी तलाशा है, जो अब तक आम लोगों की पहुंच से दूर रहे हैं। वर्ष 2027 में जब यह फिल्म प्रदर्शित होगी, तो यह न केवल संतों के प्रति आस्था रखने वालों के लिए, बल्कि इतिहास के जानकारों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण का केंद्र साबित होगी।