ओटीटी पर फिल्म की नई रिलीज
पंकज त्रिपाठी की लोकप्रिय फिल्म ओह माय डॉग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी ओटीटी पर उपलब्ध करा दी गई है। इस नई रिलीज के बाद दर्शक अपने घरों में बैठकर ही इस बेहतरीन सिनेमा का आनंद ले सकते हैं। सिनेमाघरों के बाद अब इस फिल्म की पहुंच सीधे मोबाइल और टेलीविजन स्क्रीन पर हो गई है। मनोरंजन जगत में इस फिल्म की रिलीज को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। फिल्म की कहानी और इसके कलाकारों के अभिनय को देखने के लिए लोग ओटीटी का रुख कर रहे हैं। इस रिलीज से उन तमाम लोगों को बड़ी राहत मिली है जो सिनेमाघरों तक नहीं जा पाए थे। घर पर ही परिवार के साथ फिल्म देखने का यह एक अच्छा मौका बन गया है। डिजिटल माध्यम पर आने के बाद इस फिल्म की लोकप्रियता में और अधिक बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। दर्शक आसानी से सब्सक्रिप्शन के जरिए इस फिल्म को अपने डिवाइस पर चला सकते हैं और बिना किसी बाधा के इसका पूरा लुत्फ उठा सकते हैं।
फिल्म की रेटिंग और रिकॉर्ड
इस फिल्म को इंटरनेट मूवी डेटाबेस यानी आईएमडीबी पर 8.1 की शानदार और बेहतरीन रेटिंग प्राप्त हुई है। किसी भी फिल्म के लिए इतनी अच्छी रेटिंग मिलना उसके उच्च स्तर और दर्शकों की पसंद को साफ तौर पर दर्शाता है। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसमें कुल 250 कुत्तों ने काम किया है। इतने बड़े पैमाने पर जानवरों को किसी भारतीय फिल्म में शामिल करना और उनसे शूटिंग करवाना अपने आप में एक अनोखा प्रयोग रहा है। इस अनोखी विशेषता के कारण सिनेमा प्रेमियों के बीच इस फिल्म को लेकर शुरू से ही काफी चर्चा बनी हुई थी। कलाकारों के साथ-साथ इन सभी जानवरों ने भी फिल्म के दृश्यों में अपनी अद्भुत भूमिका निभाई है। फिल्म के कलाकारों और निर्देशन टीम ने इन सभी श्वान कलाकारों के साथ मिलकर काम करने के अपने अनुभवों को पहले भी साझा किया है। इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों की मौजूदगी ने पर्दे पर एक अलग ही तरह का दृश्य प्रस्तुत किया है जो दर्शकों को बहुत पसंद आ रहा है। रेटिंग के मोर्चे पर मिली यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि दर्शकों ने इस अनूठे प्रयोग को दिल से स्वीकार किया है।
पारिवारिक फिल्मों का बढ़ता महत्व
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इस प्रकार की पारिवारिक और साफ-सुथरी फिल्मों के आने से दर्शकों को एक स्वस्थ मनोरंजन मिल रहा है। पंकज त्रिपाठी जैसे मंझे हुए कलाकार की मौजूदगी फिल्मों के स्तर को और ऊंचा उठा देती है। इस तरह के प्रोजेक्ट्स से बच्चों और बुजुर्गों के बीच भी फिल्मों को लेकर रुचि बढ़ती है क्योंकि ऐसे विषयों में समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश छिपा होता है। मनोरंजन उद्योग में इस बात पर लगातार जोर दिया जाता है कि ऐसी कहानियां लाई जाएं जो पूरे परिवार के साथ बैठकर देखी जा सके। इस फिल्म की सफलता यह साबित करती है कि यदि कहानी में नयापन हो और उसे संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा जाए तो दर्शक उसे जरूर सराहते हैं। आने वाले समय में डिजिटल माध्यमों पर इस प्रकार की और भी नई रचनाओं के आने की उम्मीद की जा रही है। दर्शक अब पारंपरिक विषयों से हटकर कुछ अलग और रचनात्मक देखना पसंद कर रहे हैं। इस फिल्म ने मनोरंजन बाजार में अपनी एक अलग जगह बना ली है और लोग इसके हर एक पहलू की सराहना कर रहे हैं।