दुपहिया 2 की कहानी और मुख्य किरदार
लोकप्रिय वेब सीरीज दुपहिया का बहुप्रतीक्षित दूसरा सीजन अब ओटीटी पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हो चुका है। इस नई श्रृंखला में बिहार के काल्पनिक धड़कपुर गांव की कहानी को आगे बढ़ाया गया है। पहले सीजन की सफलता के बाद निर्माताओं ने इस बार भी गांव की सादगी और उसकी मूल आत्मा को पूरी तरह से बरकरार रखा है। कहानी की शुरुआत बनवारी लाल झा और उनके परिवार से होती है जो बेटी रोशनी की शादी टूटने के बाद गहरे संकट में हैं। रोशनी की शादी केवल इसलिए टूट गई थी क्योंकि दूल्हे पक्ष को दहेज में एक दुपहिया यानी मोटरसाइकिल चाहिए थी। इसके बाद गुस्से में आकर रोशनी ने सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा देने और अपनी शर्तों पर जीवन जीने का संकल्प लिया था। इस सीजन में बनवारी लाल के परिवार के सामने आर्थिक तंगी और सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने की बड़ी चुनौती है। मास्टर जी की नौकरी छिन जाने के कारण घर का खर्च चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ उनका बेटा भूगोल पूर्वांचल का पारंपरिक लोक नृत्य और थिएटर रूप लौंडा नाच करके पैसे कमाता है। हालांकि पिता बनवारी लाल अपने बेटे द्वारा इस माध्यम से कमाए गए पैसों को छूना भी पसंद नहीं करते हैं। रोशनी अपनी प्रतियोगी परीक्षा की पढ़ाई में जुटी है लेकिन उसका पाठ्यक्रम उसके लिए काफी कठिन साबित हो रहा है। गांव के इन सीधे-साधे लोगों की जिंदगी में एक नया मोड़ तब आता है जब वहां पांच जी नेटवर्क का टावर लगाने का प्रस्ताव पहुंचता है।
गांव में 5जी टावर और पेपर लीक का संकट
धड़कपुर गांव की शांत और सामान्य जिंदगी में अचानक उथल-पुथल मच जाती है जब वहां पांच जी नेटवर्क टावर लगाने की बात आती है। बनवारी लाल को लगता है कि टावर लगने से उनकी बंद किस्मत का ताला खुल जाएगा और आर्थिक हालात सुधर जाएंगे। लेकिन इसके विपरीत पूरे गांव में पांच जी तकनीक को लेकर अजीबोगरीब अफवाहें फैल जाती हैं जिससे स्थिति काफी बिगड़ जाती है। ग्रामीण लोग हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए मोबाइल टावर को ही जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। इसी बीच कहानी में एक और गंभीर मुद्दा जुड़ता है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक से जुड़ा हुआ है। रोशनी अपनी परीक्षा की तैयारी में मदद के लिए अमावस की सहायता लेती है जो इस दिशा में उसकी मदद करता है। कहानी में दलाल प्रथम कुमार की एंट्री होती है जो पैसे लेकर नकल कराने और पेपर लीक के अवैध धंधे में शामिल है। पुलिस इंस्पेक्टर मिथिलेश इस अवैध धंधे का भंडाफोड़ करने के लिए प्रथम कुमार के पीछे हाथ धोकर पड़ जाते हैं। लेकिन प्रथम की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस इंस्पेक्टर मिथिलेश के हाथ भी इस मामले में काफी हद तक बंध जाते हैं। एक तरफ गांव में पांच जी टावर को लेकर फैली भसड़ मची हुई है तो दूसरी तरफ परीक्षाओं में पेपर लीक का गंभीर संकट खड़ा है। इन दोनों ही बड़ी समस्याओं के बीच बनवारी लाल का पूरा परिवार बुरी तरह से फंस जाता है। परिवार के सभी सदस्य इस अजीबोगरीब और कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए लगातार संघर्ष करते नजर आते हैं।
कलाकारों का अभिनय और निर्देशन की विशेषताएं
सोनम नायर के निर्देशन में बनी इस सीरीज में कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से जान फूंक दी है। बनवारी लाल के मुख्य किरदार में गजराज राव ने एक बार फिर अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया है। वहीं पुष्पलता यादव के किरदार में रेणुका शहाणे और दलाल प्रथम के रूप में दिनेश लाल यादव निरहुआ भी काफी जंचते हैं। अभिनेता स्पर्श श्रीवास्तव ने भूगोल की भूमिका को बखूबी निभाया है जो हीरो बनने की चाहत रखता है लेकिन लौंडा नाच के चलते बनी अपनी इमेज से परेशान है। शिवानी रघुवंशी, यशपाल शर्मा और भुवन अरोड़ा जैसे अन्य कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। लेखन का जिम्मा संभालने वाले अविनाश द्विवेदी और चिराग गर्ग ने मजबूत डायलॉग और स्क्रीनप्ले के जरिए सीरीज को रोचक बनाया है। हालांकि कुछ स्थानों पर कहानी की धीमी रफ्तार और बिखराव जरूर महसूस होता है क्योंकि इस बार कई ट्रैक एक साथ चलाए गए हैं। इसके बावजूद साफ-सुथरी कॉमेडी, हल्के-फुल्के हास्य और देसी मिट्टी की खुशबू इसे एक परिवार के साथ देखने लायक मनोरंजक विकल्प बनाती है। यह श्रृंखला दर्शकों को किसी भी स्तर पर बोर नहीं होने देती है और पहले एपिसोड से लेकर आखिरी तक अपनी पकड़ बनाए रखती है।