पुतिन से पहले पहुंच जाता है उनका टॉयलेट: जिनपिंग स्पेशल कार साथ लाते हैं; BRICS समिट में विदेशी नेताओं की स...
भारत-रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट डील संभव: पुतिन BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे; 2016 की गोवा समिट में S-40...
अरविंद केजरीवाल ने सौरभ दास से क्या कहा? पंजाब पहुंच गई थी कॉकरोचों की टीम
हूती विद्रोहियों ने रेड सी में मोखा पोर्ट पर किया क़ब्ज़ा- रिपोर्ट, सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका
BRICS Summit: भारत आएंगे पेजेश्कियन तो एयरस्पेस में कितना खतरा? रूस-चीन से ज्यादा ईरान के प्लेन पर नजर
केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटा, लैंडस्लाइड से बंद: यूपी के मिर्जापुर में पुल, फर्रुखाबाद में हाईवे डूबा; M...
BRICS समिट पर कांग्रेस में मतभेद: चिदंबरम ने पूछा- देश को क्या मिला; थरूर बोले- 11 देश के नेताओं को एक मंच ...
चलती मुंबई लोकल से गिरी महिला, खचाखच भरी ट्रेन का वीडियो देख सुरक्षा उठे पर सवाल
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
फिल्म टूरिज्म का क्रेज: हैदराबाद कॉन्क्लेव में उत्तराखंड की नीति से प्रभावित हुए दक्षिण भारतीय निर्माता
हैदराबाद में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ के दौरान उत्तराखंड की फिल्म नीति और खूबसूरत प्राकृतिक लोकेशनों ने दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिससे आने वाले समय में पहाड़ी राज्यों में शूटिंग बढ़ने की उम्मीद है।
A
Ankit Yadav
11 सित 2026, 14:15
हाल ही में हैदराबाद शहर में इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से सिनेमा जगत के कई दिग्गज और नामी निर्माता-निर्देशकों ने शिरकत की। इस महत्वपूर्ण मंच पर उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाई गई नई और प्रगतिशील फिल्म नीति की जमकर सराहना की गई। दक्षिण भारत के कई प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं ने उत्तराखंड की पारदर्शी व्यवस्था, शूटिंग के लिए मिलने वाली एकल खिड़की (सिंगल विंडो) अनुमति और राज्य की ओर से मिलने वाले तमाम प्रोत्साहनों की प्रशंसा की। उनका मानना है कि इस प्रकार की नीतियों से बाहरी राज्यों के फिल्म मेकर्स को पहाड़ी इलाकों में आकर अपनी फिल्मों की शूटिंग करने में बहुत आसानी होती है और अनावश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं से राहत मिलती है।
प्राकृतिक सौंदर्य और लोकेशनों का जादू
दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री अपनी भव्य और विजुअल रूप से बेहद आकर्षक फिल्मों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। कॉन्क्लेव के दौरान जब उत्तराखंड के मनमोहक पर्यटक स्थलों, बर्फीली चोटियों, कल-कल बहती नदियों और हरे-भरे जंगलों की वीडियो प्रस्तुतियां दिखाई गईं, तो वहां मौजूद निर्माता खासे प्रभावित हुए। कई जाने-माने प्रोड्यूसर्स ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक लोकेशनें न केवल एक्शन और रोमांस बल्कि हर जॉनर की फिल्मों के लिए एकदम मुफीद हैं। उत्तर भारत के इस शांत और सुंदर राज्य में फिल्मों की शूटिंग करने से न केवल दक्षिण के दर्शकों को एक नया दृश्यात्मक अनुभव मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। निर्माताओं ने यह भी कहा कि वे आने वाले समय में अपनी आगामी परियोजनाओं के लिए उत्तराखंड की वादियों का दौरा करने की योजना बना रहे हैं।
फिल्म निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर और दक्षिण भारतीय सिनेमा के बीच इस प्रकार का सांस्कृतिक और व्यावसायिक आदान-प्रदान भारतीय फिल्म उद्योग को और अधिक मजबूत करेगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए कई फिल्म विश्लेषकों ने कहा कि लखनऊ और हैदराबाद जैसे बड़े सांस्कृतिक केंद्रों से जब इस प्रकार के सकारात्मक संदेश जाते हैं, तो पूरे देश का फिल्म भाईचारा एक मंच पर आ जाता है। उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधियों ने भी कॉन्क्लेव में आए सभी मेहमानों का स्वागत किया और उन्हें राज्य में हरसंभव प्रशासनिक सहयोग का पूरा भरोसा दिलाया। राज्य प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड को भारत का सबसे पसंदीदा और फिल्म-फ्रेंडली डेस्टिनेशन बनाना है, जिसके लिए लगातार बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा रहा है।
इस आयोजन के बाद अब कई फिल्म प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड में अपनी आगामी फिल्मों की शूटिंग की योजना पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में दक्षिण भारतीय फिल्मों की कई यूनिट्स उत्तराखंड के विभिन्न जिलों का दौरा कर सकती हैं ताकि वे अपनी कहानियों के हिसाब से बेहतरीन लोकेशनों का चयन कर सकें। इस पूरे घटनाक्रम को उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को होटल, परिवहन, खानपान और प्रत्यक्ष फिल्म निर्माण के क्षेत्र में रोजगार के ढेरों नए अवसर मिलेंगे।