बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
पारंपरिक लोक कलाओं और संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए संस्कृति विभाग द्वारा सोमवार को एक विशेष आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गोरखपुर शहर के बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ जहां कजरी महोत्सव का भव्य आयोजन रखा गया था। इस सांस्कतिक कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ जनपद के न्यायाधीश राजकुमार सिंह तथा जानी मानी गायिका मालिनी अवस्थी ने दीप जलाकर किया। इस उद्घाटन समारोह के बाद मंच पर लोक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन शुरू किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की पुरानी कलाओं को बचाना और उन्हें आगे बढ़ाना था। मंच पर कलाकारों ने पारंपरिक धुनों पर आधारित कजरी गायन और लोक संगीत की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं जिससे पूरा परिसर संगीत की स्वर लहरियों से गूंज उठा। इस आयोजन के दौरान सभागार में मौजूद दर्शकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और कलाकारों की कला को देखकर उनका उत्साहवर्धन किया। संगीत प्रेमियों के लिए यह एक बहुत ही सुंदर और यादगार शाम साबित हुई जहां उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति के दर्शन एक ही मंच पर आसानी से हो गए और लोगों ने लोक संगीत का पूरा आनंद उठाया।
मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति से सजी कजरी महोत्सव की शाम
इस पूरे महोत्सव के दौरान प्रख्यात गायिका मालिनी अवस्थी की गायकी मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रही। उन्होंने मंच पर आते ही अपनी सुमधुर आवाज में कजरी और अन्य लोकगीतों की एक से बढ़कर एक मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। उनकी इन जादुई प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। अपनी कला और पारंपरिक लोकधुनों के माध्यम से उन्होंने पूर्वांचल की बेहद समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपरा को बहुत ही प्रभावी ढंग से दर्शकों के सामने रखा। केवल वे ही नहीं बल्कि उनके अलावा जौनपुर शहर से विशेष रूप से आए हुए गायक राजकुमार तिवारी ने भी अपनी कला का जादू बिखेरा। इसके साथ ही गोरखपुर की अपनी स्थानीय गायिका इंदु गुप्ता और सविता त्रिपाठी ने भी अपनी मधुर आवाज में बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं। इन सभी कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत की पुरानी और महान विरासत को मंच पर पूरी तरह जीवित कर दिया। दर्शक लगातार कलाकारों का हौसला बढ़ा रहे थे और हर प्रस्तुति के बाद तालियां बजाकर उनका स्वागत कर रहे थे। कलाकारों की मेहनत और उनकी गायकी ने पूरे माहौल को बहुत ही खुशनुमा और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
पूर्वांचल की लोक संस्कृति को सहेजने की अनूठी पहल
इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़े रखना है। लोक संस्कृति एवं पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार और संस्कृति विभाग लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है। गोरखपुर में आयोजित इस कजरी महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आज भी लोग पारंपरिक संगीत को कितना पसंद करते हैं। कार्यक्रम के दौरान जब कलाकारों द्वारा कजरी और लोकगीत गाए जा रहे थे तो पूरा ऑडिटोरियम संगीत की धुन से गूंज रहा था। दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने बहुत ही उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कलाकारों का करतल ध्वनि से लगातार उत्साहवर्धन किया। ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को एक बहुत बड़ा मंच मिलता है जिससे उनकी कला दूर-दूर तक पहुंचती है। जौनपुर और गोरखपुर जैसे जिलों से आए कलाकारों की सहभागिता ने यह दिखाया कि हमारे गांवों और कस्बों में लोक संगीत की कितनी गहरी जड़ें हैं। इस सफल आयोजन ने शहर के लोगों को एक सांस्कृतिक शाम दी और पारंपरिक कलाओं के प्रति प्रेम को फिर से ताजा कर दिया। संस्कृति विभाग का यह प्रयास भविष्य में भी लोक कलाओं को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित होगा।