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सिनेमा की ताकत: फिल्म एक्सपो इंडिया में सीएम सैनी ने कही समाज को दिशा देने की बात
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने फिल्म एक्सपो इंडिया के दौरान सिनेमा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह समाज को एक नई दिशा देने और उसे जागरूक करने का शक्तिशाली माध्यम भी हैं।
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Ankit Yadav
30 अग 2026, 12:07
सिनेमा और कला जगत के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों का हमारे सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में एक विशेष स्थान होता है। इसी क्रम में, फिल्म एक्सपो इंडिया जैसे बड़े मंचों पर जब देश के प्रमुख राजनेता और नीति निर्माता अपनी बात रखते हैं, तो उसका प्रभाव दूरगामी होता है। हाल ही में इस महत्वपूर्ण आयोजन में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री ने भारतीय फिल्म उद्योग के सामाजिक योगदान की सराहना की और इसके प्रभाव पर गहराई से अपने विचार रखे। उनके अनुसार, चलचित्र केवल वक्त बिताने या लोगों का मनोरंजन करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये समाज की चेतना को झकझोरने का काम करते हैं।
मनोरंजन से परे सामाजिक प्रभाव
फिल्मों का इतिहास इस बात का गवाह है कि परदे पर दिखाई जाने वाली कहानियां सीधे तौर पर आम जनमानस के दिलों और दिमाग पर गहरा असर डालती हैं। जब भी किसी फिल्म में सामाजिक मुद्दों, कुरीतियों, या मानवीय संवेदनाओं को प्रमुखता से उठाया जाता है, तो वह समाज में सकारात्मक बदलाव की बयार लाने में मददगार साबित होती है। इस बात को रेखांकित करते हुए वक्ताओं और विशिष्ट अतिथियों ने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों को इस शक्ति का एहसास होना चाहिए। समाज के हर वर्ग तक अपनी बात पहुंचाने का जो सामर्थ्य सिनेमा के पास है, वह किसी अन्य माध्यम के लिए उतना आसान नहीं होता। यही कारण है कि इसे समाज का दर्पण भी कहा जाता है, जो अच्छाइयों और बुराइयों दोनों को बिना किसी लाग-लपेट के सबके सामने रखता है।
आधुनिक दौर में तकनीक के विकास के साथ ही सिनेमा के स्वरूप में भी काफी बदलाव आया है। आज केवल बड़े पर्दे तक ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ओटीटी के जरिए भी विभिन्न प्रकार की विषय-वस्तु दर्शकों तक पहुंच रही है। ऐसे समय में यह और भी अधिक आवश्यक हो जाता है कि फिल्मों के माध्यम से परोसे जाने वाले संदेश समाज के नैतिक मूल्यों के अनुकूल हों। इस दिशा में सरकार और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों द्वारा भी लगातार ऐसे प्रयास किए जाते हैं ताकि रचनात्मक स्वतंत्रता बनी रहे और साथ ही सामाजिक उत्तरदायित्व का भी पूरा ध्यान रखा जा सके। फिल्म एक्सपो जैसे आयोजनों से न केवल कलाकारों और निर्माताओं को एक मंच मिलता है, बल्कि वे अपनी कला के जरिए राष्ट्र निर्माण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं, इस पर भी गंभीर चर्चाएं होती हैं।
कार्यक्रम के अंत में भविष्य की संभावनाओं और फिल्म उद्योग को मिलने वाले प्रोत्साहन को लेकर भी सकारात्मक उम्मीदें जताई गईं। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कला के प्रति सम्मान भी बढ़ता है। आने वाले समय में यह उम्मीद की जा रही है कि सिनेमा अपनी इस गौरवशाली परंपरा को बनाए रखते हुए समाज को एकजुट करने और प्रगति के मार्ग पर आगे ले जाने में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाता रहेगा, जिससे देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को और अधिक मजबूती मिलेगी।