कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      सऊदी अरब पर अटैक से भड़का भारत, विदेश मंत्रालय की दो टूक- तुरंत बंद हों हमले      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!      दिल्‍ली नगर निगम में विकास निधि-प्रदूषण पर AAP का हंगामा, पार्षदों में हाथापाई की नौबत; मेयर को सुरक्षित निकाला     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
मनोरंजन

यादों का सफर: रोडवेज बसों में आज भी गूंजता है 36 साल पुराना 90 के दशक का आइकॉनिक गीत

भारतीय roadways बसों में सफर के दौरान आज भी एक पुराना संगीत गूंजता है, जो नब्बे के दशक की सुनहरी यादों को ताजा कर देता है और यात्रियों को पुरानी दुनिया में ले जाता है।

A
Ankit Yadav
31 अग 2026, 10:38
यादों का सफर: रोडवेज बसों में आज भी गूंजता है 36 साल पुराना 90 के दशक का आइकॉनिक गीत
भारतीय संस्कृति और जनजीवन का एक अहम हिस्सा रही रोडवेज बसों में सफर करने का अपना ही एक अलग अनुभव होता है। खिड़कियों से आती ठंडी हवा, बाहर भागते हुए पेड़ और बस के साउंड सिस्टम पर बजता हुआ संगीत, ये सभी मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो किसी भी यात्री के सफर को यादगार बना देता है। आज के आधुनिक दौर में जहां हर चीज तेजी से बदल रही है, वहीं सार्वजनिक परिवहन का एक पहलू ऐसा भी है जो समय के पहिए को पीछे खींचकर लोगों को पुराने दौर की सैर करा देता है।

पुराने दौर की यादें और संगीत का जादू

हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, आज भी देश की कई रोडवेज बसों में लगभग छत्तीस साल पुराना एक ऐसा गीत बजाया जाता है जो नब्बे के दशक के दौरान बेहद लोकप्रिय और आइकॉनिक हुआ करता था। उस दशक की संगीत शैली और धुनों की एक अलग ही खूबी थी जो सीधे दिलों को छू लेती थी। जब बस के सफर के दौरान अचानक से वही पुराना संगीत कानों में पड़ता है, तो उम्र के हर पड़ाव के यात्रियों के चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान आ जाती है। यह धुनें सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि उस दौर के सुनहरे दिनों की याद दिलाने का एक जरिया बन चुकी हैं।

समय के साथ संगीत का बदलता स्वरूप

आज के समय में जब लोग नए और आधुनिक गानों की दीवानगी में डूबे हुए हैं, तब भी सरकारी और सार्वजनिक बसों में इन पुरानी धुनों का बजना अपने आप में एक अनोखी बात है। नब्बे का दशक संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर माना जाता है, जब मेलोडी और अर्थपूर्ण शब्दों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था। आज की युवा पीढ़ी भले ही रीमिक्स और फास्ट बीट्स की आदी हो चुकी है, लेकिन जब वे रोडवेज बसों में सफर करते हैं और इस छत्तीस साल पुराने प्रतिष्ठित गीत को सुनते हैं, तो वे भी उस पुराने दौर की सादगी और गहराई से जुड़ जाते हैं।

यात्रियों की प्रतिक्रिया और सांस्कृतिक महत्व

दैनिक यात्रियों और सफर करने वाले लोगों के बीच इस बात की हमेशा चर्चा रहती है कि कैसे संगीत लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है। बस में बैठे अलग-अलग उम्र के अजनबी लोग जब एक ही पुरानी धुन को सुनते हैं, तो उनके बीच एक अनकहा सा रिश्ता बन जाता है। इस तरह के गाने हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं और आधुनिकीकरण की अंधी दौड़ के बीच अपने अतीत को याद करने का मौका देते हैं। रोडवेज बसों का यह सफर केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं और यादों का एक खूबसूरत कारवां बन जाता है जो आने वाले समय में भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज