दैनिक जीवन में मोबाइल की बढ़ती घुसपैठ और उसके शारीरिक संकेत
सुबह आँख खुलते ही हमारा हाथ सबसे पहले मोबाइल फोन की तरफ बढ़ता है और रात को बिस्तर पर सोने जाने तक यह सिलसिला जारी रहता है। दफ्तर में कंप्यूटर की स्क्रीन, रास्ते में चलते हुए फोन का इस्तेमाल, खाने की मेज पर भी मोबाइल पर नजरें गड़ाए रखना अब सामान्य बात हो गई है। यह उपकरण अब हमारी दिनचर्या का एक अलग हिस्सा नहीं रहा बल्कि इसने पूरी दिनचर्या पर कब्जा कर लिया है। ऐसे में यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि आखिर फोन से दूरी बनाने का सही समय कौन सा है और इसका तरीका क्या होना चाहिए। हमारा शरीर और मन इस अत्यधिक उपयोग के संकेत खुद ही देने लगते हैं लेकिन हम रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में उन पर ध्यान नहीं देते हैं। सबसे पहला और मुख्य संकेत हमारी आँखों में नजर आता है। पूरे दिन के काम के बाद शाम को आँखों में भारीपन, तेज थकान या हल्की जलन महसूस होना आजकल बहुत आम मान लिया गया है। यदि यह समस्या रोज होने लगे तो यह साफ इशारा है कि अब आँखों को आराम की आवश्यकता है। लगातार पास की स्क्रीन को देखते रहने से आँखों की मांसपेशियां अधिक मेहनत करती हैं और दिन ढलते-ढलते वे जवाब देने लगती हैं।
ध्यान का भटकना और नींद पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव
फोन के अत्यधिक इस्तेमाल का दूसरा स्पष्ट संकेत हमारे ध्यान का लगातार बिखरना है। पेशेवर काम करते समय बिना किसी घंटी या सूचना के बार-बार फोन को हाथ में उठा लेना इस बात का प्रमाण है। किसी अन्य व्यक्ति से आमने-सामने बातचीत के दौरान भी बीच-बीच में स्क्रीन पर देखना यह बताता है कि मोबाइल अब हमारी जरूरत नहीं बल्कि एक गहरी आदत बन चुका है। इसके अलावा तीसरा बड़ा बदलाव हमारी नींद के चक्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बिस्तर पर लेटकर देर रात तक फोन पर अलग-अलग सामग्री स्क्रॉल करते रहने से समय पर नींद नहीं आती है। इसके परिणामस्वरूप अगली सुबह उठने पर भी शरीर में लगातार थकान बनी रहती है। मोबाइल देखते समय हमारी गर्दन और कंधे झुके रहते हैं जिसके कारण इन अंगों में अकड़न और दर्द होना भी एक आम समस्या बन गई है। ब्रेक लेने का यह बिल्कुल अर्थ नहीं है कि आप हमेशा के लिए फोन का इस्तेमाल करना बंद कर दें। इसकी शुरुआत करने का सबसे सरल तरीका यह है कि आप अपने काम के प्रत्येक घंटे के बाद कुछ पलों का एक छोटा सा विराम तय कर लें। इस निर्धारित विराम के दौरान अपनी सीट से उठकर खड़े होना, थोड़ा पानी पीना या खिड़की से बाहर किसी दूर की वस्तु को देखना काफी फायदेमंद साबित होता है। इस तरह का एक छोटा सा बदलाव भी आपके पूरे दिन की थकान को काफी हद तक कम कर सकता है।
बचाव के आसान तरीके और विशेषज्ञों की संतुलित सलाह
आँखों को आराम देने के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक लोकप्रिय नियम 20-20-20 का पालन करने की सलाह दी जाती है। इस नियम के अनुसार हर बीस मिनट के अंतराल पर बीस सेकंड के लिए अपनी नजरें स्क्रीन से हटाकर किसी दूर स्थित वस्तु पर टिकानी चाहिए। यह कोई चिकित्सकीय इलाज नहीं है बल्कि लगातार पास देखने के कारण उत्पन्न होने वाले तनाव से आँखों को राहत देने का एक व्यावहारिक तरीका है। इसे नौकरीपेशा लोग अपने कार्यालय में बैठकर भी आसानी से अपनी कार्यशैली का हिस्सा बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त भोजन करते समय और सोने जाने से पहले के समय को पूरी तरह फोन-मुक्त रखने का नियम सबसे अधिक प्रभावी साबित होता है। खाना खाते समय मोबाइल को किसी दूसरे कमरे में रख देना चाहिए ताकि पूरा ध्यान भोजन और परिवार के सदस्यों के साथ पर केंद्रित रहे। सोने से कुछ वक्त पहले सभी प्रकार की स्क्रीन बंद कर देने से तय समय पर नींद आने लगती है। फोन की अनावश्यक सूचनाओं और नोटिफ़िकेशन को बंद करने से भी बार-बार ध्यान उसकी तरफ नहीं जाता है और मन शांत रहता है। इसके अलावा फोन देखने का एक निश्चित समय तय कर लेना भी बेहद मददगार होता है। उदाहरण के लिए आप हर आधे घंटे में केवल एक बार ही अपने संदेश और सूचनाएं देखने का नियम बना सकते हैं। शुरुआत के चार या पांच दिनों में आपका मन बार-बार फोन की तरफ भागेगा लेकिन उसके बाद यह एक पक्की आदत बन जाएगी। कई लोग काम के घंटों के दौरान अपने मोबाइल को मेज की दराज में या स्क्रीन नीचे की तरफ करके रख देते हैं ताकि वह नजरों के सामने न आए। जो चीज हमारी आँखों के सामने नहीं होती है वह हमारा ध्यान भी कम आकर्षित करती है। यह केवल एक संतुलित जीवनशैली की सलाह है और यदि आँखों में तकलीफ, सिरदर्द या नींद की समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से मिलना ही बेहतर होता है।