लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर और बहराइच जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को एक अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने दोनों जिलों के प्रशासन को निर्देश दिया है कि दुष्कर्म पीड़िताओं को मुआवजा देने की लंबित प्रक्रिया को हर हाल में अगले 40 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। यह निर्देश पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है।
मामले की मुख्य बातें
मुआवजा प्रक्रिया में तेजी: हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कहा कि गंभीर अपराधों की पीड़िताओं को वैधानिक नियमों के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता और मुआवजा समय पर मिलना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
समय-सीमा तय: अदालत ने दोनों जिलाधिकारियों को स्पष्ट रूप से 40 दिन की समय-सीमा दी है, जिसके भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करके पीड़ितों को मुआवजा राशि उनके खातों तक पहुंचानी होगी।
न्यायिक और प्रशासनिक जवाबदेही: अदालत के इस रुख से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता राशि के वितरण को लेकर प्रशासन की जवाबदेही तय की जा रही है।
आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट के इस सख्त निर्देश के बाद अब सीतापुर और बहराइच जिला प्रशासन ने मुआवजे के मामलों की फाइलों की समीक्षा शुरू कर दी है। तय समय-सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है। इस प्रकार के कानूनी कदमों से पीड़िताओं को जल्द राहत मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।