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राजनीति ब्रेकिंग

डीजीपी नियुक्ति विवाद: झारखंड में एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया

झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर हुई नियुक्ति को लेकर कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी ने शीर्ष अदालत के निर्देशों की अवहेलना का गंभीर मुद्दा उठाया है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 16:05
डीजीपी नियुक्ति विवाद: झारखंड में एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया
झारखंड राज्य में पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर गंभीर कानूनी सवालों के घेरे में आ गई है। इस ताज़ा मामले में न्यायालय द्वारा नियुक्त किए गए एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट और तर्कों के माध्यम से यह बात सामने रखी है कि राज्य प्रशासन द्वारा अपनाई गई नियुक्ति प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर तय किए गए दिशा-निर्देशों और मानदंडों के विपरीत है। इस कानूनी विकास से प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले दिनों में इस पर उच्च स्तर पर राजनीतिक तथा विधिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

कानूनी प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

देश की सबसे बड़ी अदालत ने पुलिस बलों के मुखिया यानी डीजीपी के पदों पर चयन को पारदर्शी बनाने और राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करने के लिए बेहद कड़े नियम निर्धारित किए हैं। इन नियमों के तहत संघ लोक सेवा आयोग की संस्तुति और एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है ताकि योग्यता और वरिष्ठता को प्राथमिकता मिले। एमिकस क्यूरी द्वारा उठाए गए इस कदम से यह सवाल गहरा गया है कि क्या झारखंड में हुई इस विशेष नियुक्ति के दौरान तयशुदा कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की गई है। इस तरह के मामलों में न्यायपालिका की पैनी नजर हमेशा से प्रशासनिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया

एमिकस क्यूरी द्वारा इस प्रकार के कड़े ऑब्जर्वेशन सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक पार्टियों और विरोधी दलों को भी सरकार को घेरने का एक और मौका मिल गया है। हालांकि शासन और प्रशासन की तरफ से अभी तक इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले अदालती सत्रों में यह मामला बेहद अहम साबित होगा। यदि न्यायालय इस मामले में कोई सख्त टिप्पणी करता है या कड़े निर्देश जारी करता है, तो झारखंड सरकार को अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस प्रशासन के शीर्ष पदों पर होने वाली नियुक्तियों को लेकर अब देश भर में पारदर्शिता और कानूनी नियमों का पालन कितना अनिवार्य हो चुका है। आम जनता और कानूनी विशेषज्ञों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई के दौरान अदालत इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और राज्य सरकार अपनी तरफ से क्या सफाई पेश करती है।
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