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राजनीति ब्रेकिंग

एनडीए में घमासान: आरक्षण के मुद्दे पर आमने-सामने आए चिराग पासवान और जीतन राम मांझी

राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन के भीतर आरक्षण को लेकर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है, जहां प्रमुख सहयोगी नेताओं के बीच तीखा मतभेद देखा जा रहा है।

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Ankit Yadav
30 अग 2026, 13:43
एनडीए में घमासान: आरक्षण के मुद्दे पर आमने-सामने आए चिराग पासवान और जीतन राम मांझी
देश के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर ही आरक्षण के संवेदनशील विषय पर गंभीर वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए। इस ताजा घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बीच तीखी तनातनी देखने को मिली है, जिससे राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दोनों ही नेता अपने-अपने दलित और पिछड़े समुदायों के हितों की पैरवी करते आए हैं, और इस नए विवाद ने गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरक्षण के मुद्दे पर सियासी उबाल

बिहार और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन रखने वाले इन दोनों क्षत्रपों के बीच हालिया बयानबाजी ने राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है। आरक्षण के प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन और समीक्षा को लेकर दोनों नेताओं के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है, जो अक्सर गठबंधन के भीतर असंतोष का कारण बन जाता है। जहां एक तरफ इस तरह के नीतिगत विषयों पर एकजुटता की उम्मीद की जाती है, वहीं ऐसे अंतर्विरोध विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए सरकार पर निशाना साधने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है यदि समय रहते शीर्ष नेतृत्व द्वारा इसे सुलझाने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। दलित राजनीति के परिदृश्य में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों ही महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं, और दोनों का प्रभाव राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर डालता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की वैचारिक खटास सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। गठबंधन के अन्य घटकों की नजरें भी इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं ताकि यह समझा जा सके कि आने वाले समय में यह तनाव क्या रूप लेगा।

गठबंधन की एकजुटता पर असर

इस प्रकार के आंतरिक मतभेदों से एनडीए की एकजुटता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाने लगा है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर शीर्ष स्तर से कोई बड़ी बयानबाजी सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा इस मामले में मध्यस्थता की भूमिका निभाती है और दोनों सहयोगियों के बीच उपजे इस गतिरोध को समाप्त करने में सफल होती है। आगामी चुनावी रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए इस तरह की आंतरिक असहमति को जल्द से जल्द दूर करना गठबंधन के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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