ब्यूनस आयर्स में शानदार विदाई
फुटबॉल जगत के सबसे बड़े सितारों में गिने जाने वाले लियोनल मेसी ने नीली और सफेद जर्सी को अलविदा कह दिया है। अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के लिए उनका यह अंतिम अंतरराष्ट्रीय मुकाबला ब्यूनस आयर्स के प्रसिद्ध एस्टाडियो मोनुमेंटल मैदान पर आयोजित हुआ था। इस दोस्ताना मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम का सामना बेनिन के खिलाड़ियों से हुआ था। घरेलू दर्शकों के सामने खेलते हुए मेजबान टीम ने तीन गोल दागे और विरोधी टीम को एक भी गोल नहीं करने दिया। इस तरह मैच का परिणाम तीन-शून्य से अर्जेंटीना के पक्ष में रहा। अपने करियर के इस आखिरी मुकाबले में मैदान पर उतरे इस महान खिलाड़ी ने एक बेहतरीन गोल किया। इसके अलावा उन्होंने टीम की ओर से किए गए बाकी दोनों गोलों में भी अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैदान पर उनके इस आखिरी प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका खेल कितना ऊंचे स्तर का रहा है। इस मुकाबले के साथ ही अर्जेंटीना की वरिष्ठ राष्ट्रीय टीम के लिए उनका इक्कीस साल से भी अधिक लंबा सफर आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है।
अभूतपूर्व आंकड़े और ढेरों रिकॉर्ड
इस महान खिलाड़ी ने वर्ष दो हजार पांच में अर्जेंटीना की सीनियर टीम के लिए अपना पदार्पण किया था। अपने लंबे और ऐतिहासिक सफर के दौरान उन्होंने देश के लिए कुल दो सौ आठ मैच खेले। इन सभी मुकाबलों में उन्होंने कुल एक सौ छब्बीस गोल दागे और अपने साथियों को अड़सठ गोल करने में सीधी सहायता प्रदान की। वह देश की तरफ से सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय टीम के लिए सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम रखते हैं। क्लब स्तर पर भी उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है और बार्सिलोना के लिए उन्होंने सात सौ अठहत्तर मैचों में छह सौ बहत्तर गोल किए। उन्होंने अपने क्लब को पैंतीस बड़े खिताब दिलाने में मदद की और वर्ष दो हजार बारह में एक कैलेंडर वर्ष के भीतर नब्बे से ज्यादा गोल दागे। पेरिस सेंट-जर्मेन के बाद इंटर मियामी से जुड़ने वाले इस खिलाड़ी ने वर्ष दो हजार छब्बीस तक इस क्लब के लिए भी सौ गोल पूरे कर लिए। व्यक्तिगत उपलब्धियों की बात करें तो उनके नाम रिकॉर्ड आठ बैलन डी’ओर पुरस्कार दर्ज हैं। इसके साथ ही खेल के मैदान पर उनके द्वारा बनाए गए ढेरों रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं।
ऐतिहासिक खिताब और पुराना सफर
राष्ट्रीय टीम के साथ शुरुआती वर्षों में इस दिग्गज को काफी संघर्ष करना पड़ा था। वर्ष दो हजार चौदह के विश्व कप फाइनल में जर्मनी के खिलाफ हार मिली थी। इसके बाद दो हजार पंद्रह और दो हजार सोलह के कोपा अमेरिका फाइनल में भी चिली से पराजय का सामना करना पड़ा था। इन असफलताओं के बाद उन्होंने वर्ष दो हजार सोलह में अंतरराष्ट्रीय संन्यास का ऐलान कर दिया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने अपने फैसले को बदलते हुए टीम में शानदार वापसी की थी। वापसी के बाद उनके करियर का स्वर्णिम दौर शुरू हुआ और उन्होंने दो हजार इक्कीस में ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका का खिताब जीता। यह उनका पहला बड़ा सीनियर अंतरराष्ट्रीय खिताब था। इसके बाद दो हजार बाईस में फाइनलिसिमा जीती गई और फिर कतर में खेले गए विश्व कप के फाइनल में फ्रांस को हराकर देश को चैंपियन बनाया गया। उस विश्व कप में उन्होंने फाइनल में दो गोल किए और गोल्डन बॉल का पुरस्कार हासिल किया। वर्ष दो हजार चौदह के बाद दो हजार चौबीस में कोलंबिया को हराकर लगातार दूसरी बार कोपा अमेरिका जीता गया। वर्ष दो हजार छब्बीस के विश्व कप में भी उन्होंने कई नए रिकॉर्ड बनाए और छह अलग-अलग विश्व कप खेलने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बने। अब चार बड़े खिताब और ढेर सारे रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद उनका यह शानदार अंतरराष्ट्रीय अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।