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ब बड़ा घमासान: हॉकी इंडिया में नारंगी जर्सी विवाद के बाद महानिदेशक श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस और सभी अधिकार छीने गए
हॉकी इंडिया के भीतर नारंगी जर्सी को लेकर उपजे भारी विवाद के बाद महानिदेशक श्रीवास्तव पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ-साथ उनके सभी अधिकार भी वापस ले लिए गए हैं।
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Ankit Yadav
13 सित 2026, 15:52
भारतीय खेल जगत में इस समय एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसका सीधा संबंध देश की राष्ट्रीय हॉकी संस्था से है। मिली जानकारी के अनुसार, हॉकी इंडिया के भीतर नारंगी रंग की जर्सी के इस्तेमाल को लेकर जबरदस्त घमासान छिड़ गया है। इस पूरे मामले ने तूल तब पकड़ा जब संगठन के भीतर प्रशासनिक स्तर पर भारी मतभेद सामने आए। इस विवाद के केंद्र में महानिदेशक श्रीवास्तव की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसके बाद उच्च स्तर पर यह सख्त कदम उठाया गया है। संगठन की तरफ से उन्हें एक औपचारिक कारण बताओ नोटिस थमाया गया है और साथ ही उनके सभी प्रशासनिक तथा कार्यकारी अधिकार तुरंत प्रभाव से छीन लिए गए हैं। इस अचानक हुई कार्रवाई से खेल गलियारों में हलचल मच गई है और तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
नारंगी जर्सी विवाद की पृष्ठभूमि और आंतरिक कलह
नारंगी जर्सी के चयन और इसके उपयोग को लेकर पिछले कुछ दिनों से अंदरखाने काफी खींचतान चल रही थी। खेल संगठनों में अक्सर रंगों और आधिकारिक पोशाक को लेकर कड़े नियम और परंपराएं होती हैं, और इस मामले में भी कुछ ऐसा ही विवाद उभर कर सामने आया है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के निर्णय यदि बिना व्यापक सहमति के लिए जाते हैं, तो वे अक्सर इस तरह के बड़े प्रशासनिक संकटों को जन्म देते हैं। महानिदेशक श्रीवास्तव पर संगठन के नियमों के खिलाफ जाकर कुछ फैसले लेने का अंदेशा जताया जा रहा है, जिसकी वजह से हॉकी इंडिया के शीर्ष नेतृत्व को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। इस विवाद ने न केवल आंतरिक प्रशासन को प्रभावित किया है, बल्कि देश भर के खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी खेल महासंघ में इस तरह का घटनाक्रम अनुशासनहीनता और आंतरिक कलह को उजागर करता है। जब किसी शीर्ष अधिकारी के अधिकार छीने जाते हैं और उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए कहा जाता है, तो इसका अर्थ है कि मामला बेहद गंभीर है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है, क्योंकि महानिदेशक की तरफ से इस नोटिस का जवाब दिए जाने के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है। खेल प्रशासन से जुड़े लोग इस बात पर भी नजर बनाए हुए हैं कि क्या इस कार्रवाई से राष्ट्रीय स्तर पर खेल की गतिविधियों या आगामी टूर्नामेंटों की तैयारियों पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक संगठन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि बहुत जल्द एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और यह तय होगा कि संगठन के भीतर अनुशासन को कैसे सुधारा जाए। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की उम्मीद यही है कि इस तरह के प्रशासनिक विवादों का असर देश के राष्ट्रीय खेल की प्रगति पर बिल्कुल न पड़े और मामलों को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाए।