रांची में कैरेबियाई बल्लेबाजों का ऐतिहासिक प्रदर्शन
शुक्रवार को रांची के मैदान पर खेले गए दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के हाथों चार विकेट से शिकस्त झेलनी पड़ी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने निर्धारित ओवरों में 249 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में उतरी कैरेबियाई टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने पूरे मैच के दौरान मैदान पर कुल 20 छक्के जड़े, जिससे मैच का पूरा रुख उनकी तरफ मुड़ गया। मेहमान टीम ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में भारत के खिलाफ सबसे बड़े सफल रनचेज का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। भारतीय बल्लेबाजों ने अपनी क्षमता के अनुसार बड़ा स्कोर बनाया था, लेकिन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण उस लक्ष्य का बचाव करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ। इस मुकाबले में हार के बाद भारतीय खेमे में कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब टीम प्रबंधन को जल्द ही तलाशना होगा। रांची के इस रोमांचक मैच में दोनों तरफ से रनों की बरसात हुई, लेकिन अंत में मेहमान टीम बाजी मारने में सफल रही और भारत को अपनी सरजमीं पर निराशा हाथ लगी।
ओस और रोस्टन चेज की किफायती गेंदबाजी बनी हार की वजह
मैच के दौरान रांची की पिच पर ओस भारतीय गेंदबाजों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। दूसरी पारी में गेंद इतनी गीली हो गई थी कि गेंदबाजों के लिए उसे पकड़ना और सही दिशा में स्पिन कराना बहुत कठिन हो गया था। इसका सबसे बुरा असर भारतीय स्पिन गेंदबाजों के प्रदर्शन पर पड़ा, जहां अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और नमन धीर ने मिलकर अपने 9.3 ओवरों के कोटे में कुल 141 रन खर्च कर डाले। तेज गेंदबाजों को भी गीली गेंद की वजह से सही लाइन और लेंथ बनाए रखने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि ओस को एक मुख्य कारण माना जा सकता है, लेकिन बीच के ओवरों में रोस्टन चेज की गेंदबाजी भी बेहद शानदार रही। वेस्टइंडीज के इस गेंदबाज ने अपने चार ओवर के स्पेल में केवल 24 रन देकर तीन महत्वपूर्ण भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। उनके इस कसी हुई गेंदबाजी के स्पेल ने तेजी से रन बना रही भारतीय पारी की गति पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम 270 से 275 रन तक आसानी से पहुंच जाएगी, क्योंकि शुरुआती 10 ओवरों में ही टीम के 127 रन बन चुके थे। लेकिन रोस्टन चेज की घातक गेंदबाजी के कारण भारत अंतिम ओवरों में अपेक्षित रन नहीं जोड़ सका और स्कोर थोड़ा कम रह गया।
मयंक यादव के इस्तेमाल पर उठे सवाल और आगे की रणनीति
भारतीय गेंदबाजी क्रम में मयंक यादव का सही प्रकार से उपयोग नहीं किया जाना भी हार का एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। तेज गेंदबाज मयंक यादव ने मैच के दौरान कुल तीन ओवर गेंदबाजी की और उसमें तीन अहम विकेट भी चटकाए। उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन से साफ जाहिर हो रहा था कि वह कैरेबियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की पूरी क्षमता रखते थे। इसके बावजूद कप्तान और टीम प्रबंधन ने उन्हें पावरप्ले के तुरंत बाद दोबारा गेंदबाजी करने का कोई मौका नहीं दिया। जब वेस्टइंडीज की टीम तेजी से लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रही थी, तब मयंक के बचे हुए ओवर टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते थे। इस हार के बाद भारतीय टीम प्रबंधन को बड़े स्कोर का बचाव करने की अपनी पुरानी रणनीति पर गहराई से विचार करना होगा। ओस की परिस्थितियों में गेंदबाजी करने के नए तौर-तरीकों और अहम मौकों पर सही गेंदबाजों के इस्तेमाल पर भी काम करना जरूरी हो गया है। रांची के इस मुकाबले ने यह बता दिया है कि केवल बड़ा स्कोर बना देना ही जीत की गारंटी नहीं होता है, बल्कि सही समय पर सही फैसले लेना भी उतना ही जरूरी होता है। भारतीय टीम को आगामी मुकाबलों में इन सभी कमियों को दूर करते हुए मैदान पर उतरना होगा ताकि ऐसी हार से बचा जा सके।