भारतीय खेल प्राधिकरण की तरफ से मिला मजबूत संबल भारतीय दल की ओर से हाल ही में इस बात की पुष्टि की गई है कि खेल प्राधिकरण यानी साई के निरंतर सहयोग और बेहतर समन्वय के कारण प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का सफर काफी आसान हो गया है। महाद्वीपीय स्तर के इस प्रतिष्ठित आयोजन में हिस्सा लेने के लिए देश भर से जाने वाले एथलीटों को विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियां समय पर मिल रही हैं। खिलाड़ियों और उनके सहयोगी स्टाफ को मिलने वाली इन सुविधाओं से ऐन मौके पर होने वाली भागदौड़ और मानसिक तनाव में उल्लेखनीय कमी आई है। किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के लिए यह बहुत जरूरी होता है कि उनका पूरा ध्यान केवल अपने खेल और अभ्यास पर केंद्रित रहे, न कि कागजी कार्रवाई या यात्रा प्रबंधन की अन्य औपचारिकताओं पर। भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा की गई इस प्रकार की व्यवस्थाओं से दल के सदस्यों को मैदान पर अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देने के लिए अनुकूल और शांत वातावरण प्राप्त हो रहा है, जिसकी सराहना विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारियों द्वारा भी की जा रही है।
विभिन्न खेल अकादमियों और प्रशासनिक ढांचे की भूमिका इस प्रकार के वृहद अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए देश की खेल प्रणालियों को महीनों पहले से अपनी कमर कसनी पड़ती है, जिसमें राष्ट्रीय खेल महासंघों और सरकारी निकायों की संयुक्त भागीदारी होती है। अतीत में कई बार ऐसा देखा गया है कि उत्कृष्ट प्रतिभा होने के बावजूद खिलाड़ियों को वीजा, किट वितरण, समय पर टिकट और अन्य बुनियादी लॉजिस्टिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था, जिससे उनके प्रदर्शन पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। इस बार खेल प्राधिकरण की ओर से नोडल एजेंसी की तरह काम करते हुए सभी संबंधित मंत्रालयों और विमानन कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल बिठाया गया है। इसके अलावा, खेल विज्ञान और पोषण विशेषज्ञों की टीमों को भी खिलाड़ियों के साथ जोड़ा गया है ताकि वे विदेशी धरती पर अपनी फिटनेस और ऊर्जा स्तर को बरकरार रख सकें। इस समन्वित प्रशासनिक मॉडल के जरिए न केवल बजट का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि विभिन्न अनुशासनों के एथलीटों के बीच आपसी तालमेल भी बेहतर हुआ है, जिससे वे बिना किसी बाहरी बाधा के अपने मुकाबलों के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।
आगामी मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद और आगे की राह प्रशासनिक मोर्चे पर मिली इन राहतों और सुगम यात्रा प्रबंधों का सीधा सकारात्मक असर खेल मैदानों पर देखने को मिल रहा है, जिससे पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत होने की प्रबल संभावनाएं बन गई हैं। जब खिलाड़ियों को समय पर साजो-सामान और उचित प्रशिक्षण सुविधाएं मिल जाती हैं, तो उनका आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से सातवें आसमान पर होता है। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का अभियान पिछले कई संस्करणों की तुलना में अधिक व्यवस्थित और परिणाम-उन्मुख साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में जब विभिन्न स्पर्धाओं के फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे, तब इन शुरुआती प्रशासनिक सफलताओं का असली मूल्य समझ आएगा। भारतीय खेल प्राधिकरण इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के बाद भविष्य के अन्य अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भी इसी तरह के मानक स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि देश के युवा एथलीटों को कभी भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े और वे देश का नाम वैश्विक पटल पर गर्व से ऊंचा कर सकें।