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एशियन गेम्स 2026: बिहार के 11 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा, संघर्षों से पार पाकर तय किया सफर

वर्ष 2026 के एशियन गेम्स में बिहार के 11 मेधावी खिलाड़ी अपना जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इन खिलाड़ियों का यहां तक पहुंचना किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है, क्योंकि उन्होंने कई सामाजिक बाधाओं और विपरीत परिस्थितियों को पार किया है।

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Ankit Yadav
18 सित 2026, 11:31
एशियन गेम्स 2026: बिहार के 11 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा, संघर्षों से पार पाकर तय किया सफर
आगामी एशियन गेम्स 2026 में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए बिहार के 11 खिलाड़ियों का चयन किया गया है, जो राज्य के खेल जगत के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है। इन एथलीटों ने अपने जीवन में तमाम तरह की आर्थिक तंगियों, सामाजिक तानों और विषम परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया है। इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी राह बिल्कुल आसान नहीं थी, लेकिन उनके अटूट हौसले और कड़ी मेहनत ने हर बाधा को बौना साबित कर दिया। बिहार में खेल और खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद, इन युवाओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। खेल प्रेमियों और स्थानीय खेल संघों में इस बात को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है कि इस बार महाद्वीप के सबसे बड़े खेल महाकुंभ में बिहार के इतने सारे प्रतिनिधि अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

कड़े संघर्ष और ताने सहकर पाया मुकाम

खेल के मैदान पर कदम रखने से पहले ही इन खिलाड़ियों को समाज के कई वर्गों से ताने सुनने पड़े थे। खासकर महिला खिलाड़ियों के लिए खेलकूद में आगे बढ़ना और रूढ़िवादी सोच का सामना करना एक बड़ी चुनौती रहा है। समाज की परवाह न करते हुए उन्होंने केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। कई एथलीटों के पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे, जिसके कारण उन्होंने नंगे पांव अभ्यास किया और कठिन परिस्थितियों में पसीना बहाया। राज्य के कई हिस्सों में खेल के मैदानों और आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर्स का अभाव है, इसके बावजूद इन खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। किसी ने घरेलू मोर्चे पर तंगहाली झेली तो किसी ने अभ्यास के दौरान आने वाली प्रशासनिक और बुनियादी दिक्कतों का सामना किया। इन तमाम मुश्किलों को पार करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर एशियन गेम्स के दल में अपनी जगह पक्की की है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ी मिसाल है।

विपरीत परिस्थितियों और हादसों को दी मात

इन खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानी केवल तानों और गरीबी तक सीमित नहीं है, बल्कि कई लोगों ने रास्ते में भयानक घटनाओं और हादसों का भी सामना किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कुछ खिलाड़ियों ने अपने सफर के दौरान बम धमाकों और अन्य खतरनाक घटनाओं का भी नजदीक से सामना किया, लेकिन उनका जज्बा कभी कमजोर नहीं पड़ा। जान जोखिम में डालकर और हर डर को पीछे छोड़ते हुए वे अपने अभ्यास में जुटे रहे। इस प्रकार का समर्पण ही उन्हें आम खिलाड़ियों से अलग करता है। उत्तर भारत और विशेषकर बिहार-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बशर्ते उन्हें सही मंच और प्रोत्साहन मिले। इन 11 खिलाड़ियों की सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी रुकावट रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती।

राज्य भर में खुशी की लहर और उम्मीदें

बिहार से एशियन गेम्स के लिए 11 खिलाड़ियों के चयन की खबर सामने आने के बाद से ही खेल प्रेमियों और युवाओं में जबरदस्त जोश है। राज्यभर के विभिन्न खेल अकादमियों और स्कूलों में जश्न का माहौल है, क्योंकि इन खिलाड़ियों की सफलता से अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। खेल जानकारों का मानना है कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन इन खिलाड़ियों को और अधिक सहायता प्रदान करे, तो आने वाले समय में राज्य से और भी अधिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं निकलकर सामने आएंगी। अब पूरा देश और खासकर बिहार के लोग टकटकी लगाए बैठे हैं कि ये 11 खिलाड़ी एशियन गेम्स के मंच पर कैसा प्रदर्शन करते हैं और देश के लिए कितने पदक जीतकर लाते हैं। उनका यह सफर न केवल खेल के इतिहास में दर्ज होगा, बल्कि आने वाले दिनों में कई युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा।
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