अंकुश पंघाल ने जीता एशियन गेम्स गोल्ड
हरियाणा के हिसार जिले के भेरिया गांव के निवासी अंकुश पंघाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए ऐतिहासिक जीत हासिल की है। जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की मुक्केबाजी प्रतियोगिता में अंकुश ने 80 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। फाइनल मैच में उनका मुकाबला दक्षिण कोरिया के किम मिनसॉन्ग के साथ हुआ था, जिसमें उन्होंने 4-0 से एकतरफा जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही पूरे हिसार जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है और अंकुश के पैतृक गांव भेरिया में ग्रामीणों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। अंकुश की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और गांव का गौरव बढ़ाया है, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। मुक्केबाजी के क्षेत्र में अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और एक बार फिर साबित कर दिया है कि हरियाणा के खिलाड़ी खेलों में देश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
परिवार में खेल का माहौल और जीत का जश्न
अंकुश पंघाल की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का गहरा खेल प्रेम और उनका अपना कड़ा परिश्रम शामिल है। उनके पिता सुरेश पंघाल स्वयं कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं, जबकि उनकी दोनों बहनें, अजू और नीतू, भी मुक्केबाजी की खिलाड़ी हैं। घर में खेलों का ऐसा माहौल होने के कारण अंकुश को शुरुआत से ही खेल के प्रति प्रेरणा मिली। जीत की खबर मिलते ही माता मुकेश देवी, भाई अंकित और उनकी बहनों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया और इसे पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। परिजनों का कहना है कि अंकुश बचपन से ही काफी मेहनती रहा है और बॉक्सिंग रिंग में उतरने से पहले उसने कड़ी ट्रेनिंग ली है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और गांव के लोग भी इस जीत का जश्न मना रहे हैं। परिजनों के अनुसार, अंकुश की निरंतर मेहनत और उनके कोच प्रदीप सावंत का मार्गदर्शन ही है, जिसकी बदौलत आज वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे हैं।
प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि और वापसी की तैयारी
अंकुश पंघाल ने इस बड़ी सफलता तक पहुंचने के लिए बेहद विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी है। हिसार के गांव गंगवा के एक सरकारी स्कूल में उन्होंने अपने कोच प्रदीप सावंत के सानिध्य में बॉक्सिंग का कड़ा अभ्यास किया था, जहां उनके पास रिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी नहीं थीं और वे खुले मैदान में पसीना बहाते थे। इससे पहले भी अंकुश ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं, जिनमें कॉमनवेल्थ गेम्स में हासिल किया गया गोल्ड मेडल भी शामिल है। अब जब वे विदेश से अपने वतन लौटेंगे, तो हिसार में उनके जोरदार स्वागत की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। गांव के निवासियों ने निर्णय लिया है कि अंकुश की घर वापसी पर एक विशेष जुलूस निकाला जाएगा ताकि उनकी इस उपलब्धि को यादगार बनाया जा सके। उनकी यह जीत आने वाले समय में अन्य स्थानीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उन्हें खेल के प्रति और अधिक समर्पित होने के लिए प्रोत्साहित करेगी।