ट्रैक पर बिजली की रफ्तार से दौड़ीं विथ्या
स्टेडियम में दर्शकों के जोरदार शोर के बीच 400 मीटर महिला बाधा दौड़ का फाइनल शुरू हुआ। लेन संख्या चार से दौड़ रहीं विथ्या रामराज ने बेहतरीन शुरुआत की और हर बाधा को बेहद सधे अंदाज में पार किया। अंतिम सौ मीटर के स्ट्रेच में उन्होंने असाधारण रफ्तार पकड़ी और 54.75 सेकंड में दौड़ पूरी की। यह समय पीटी उषा द्वारा लॉस एंजिल्स ओलंपिक 1984 में बनाए गए 55.42 सेकंड के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से बेहतर साबित हुआ।
चार दशकों के इंतजार का ऐतिहासिक अंत
भारतीय खेल इतिहास में पीटी उषा का यह रिकॉर्ड सबसे लंबे समय तक अटूट रहने वाले कीर्तिमानों में गिना जाता था। कई पीढ़ियों के एथलीट इस आंकड़े को छूने के करीब पहुंचे थे लेकिन कोई इसे पार नहीं कर पाया था। विथ्या ने अपनी जीत के बाद कहा कि पीटी उषा हमेशा से उनकी आदर्श रही हैं और उनका रिकॉर्ड तोड़ना किसी सपने के सच होने जैसा है। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अधिकारियों ने इस प्रदर्शन को भारतीय ट्रैक एंड फील्ड का पुनर्जागरण करार दिया है।
भविष्य की वैश्विक प्रतियोगिताओं की तैयारी
इस नए राष्ट्रीय कीर्तिमान के साथ विथ्या ने आगामी विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भी अपनी योग्यता पक्की कर ली है। खेल विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण और पोषण सहायता के चलते भारतीय ट्रैक एथलीट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थानों के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। कोचों का कहना है कि तकनीकी सुधारों के जरिए उनके समय में और कुछ मिलीसेकंड का सुधार संभव है।