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जहां कभी बहाते थे पसीना, वहां चर रहे मवेशी": हरियाणा के इस स्टेडियम की बदहाली ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल
हरियाणा के भट्टू कलां में स्थित एक खेल स्टेडियम अपनी बदहाली के कारण खेल मैदान से चारागाह में तब्दील हो चुका है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों और युवाओं में भारी निराशा है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 14:35
हरियाणा के खेल बुनियादी ढांचे की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है, जहां प्रशासनिक उदासीनता के चलते एक खेल स्टेडियम अपनी पहचान खो बैठा है। भट्टू कलां क्षेत्र में स्थित इस खेल परिसर की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है, और मैदान पूरी तरह से घास-फूस व झाड़ियों से पट गया है। कभी जहां युवा अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए पसीना बहाया करते थे, आज वहां मवेशी चरते हुए नजर आते हैं। इस स्थिति ने स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों को गहराई से आहत किया है, क्योंकि जिस जमीन को खेलकूद के लिए आरक्षित किया गया था, उसका यह हाल सरकारी और प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव और अनदेखी
अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खेल अकादमियों और स्टेडियमों के नाम पर करोड़ों रुपये की घोषणाएं तो कर दी जाती हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव में वे कुछ ही वर्षों में खंडहर या बंजर जमीन बन जाते हैं। भट्टू कलां के इस स्टेडियम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उचित चारदीवारी न होने, समय पर साफ-सफाई न कराए जाने और देखभाल करने वाले कर्मचारियों की कमी के कारण यह मैदान आवारा पशुओं का अड्डा बन गया है। खेल गतिविधियों के ठप होने से यहां के उभरते हुए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अभ्यास करने के लिए या तो दूरदराज के इलाकों में जाना पड़ता है या फिर बिना किसी सुविधा के सड़कों और खाली प्लॉटों पर दौड़ लगानी पड़ती है।
स्थानीय खेल प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने इस गंभीर मुद्दे पर कई बार अपनी नाराजगी जताई है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभागों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी के लिए खेलकूद का यह साधन हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। युवाओं का भविष्य संवारने के दावे करने वाले नेताओं और अधिकारियों की कार्यशैली पर भी अब सवालिया निशान लगने लगे हैं, क्योंकि धरातल पर खेल मैदानों की सुरक्षा और रख-रखाव के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग और भविष्य की उम्मीदें
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब स्थानीय स्तर पर एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा होने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। विभिन्न खेल संघों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस स्टेडियम का कायाकल्प नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन तुरंत प्रभाव से इस मामले का संज्ञान ले, मैदान की साफ-सफाई करवाकर उसे दोबारा से खेलने योग्य बनाए तथा इसकी सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करे। देखना यह होगा कि इस आवाज के बाद सरकार और खेल विभाग कब तक गहरी नींद से जागते हैं और भट्टू कलां के युवाओं को उनका हक दिला पाते हैं।