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खेल

खेल दिवस पर चिंता: राजस्थान में 40 खेलों के लिए मात्र 50 कोच उपलब्ध जबकि जरूरत 1700 की

राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर राजस्थान से खेल जगत की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है और हजारों पद खाली पड़े हैं।

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Ankit Yadav
29 अग 2026, 10:59
खेल दिवस पर चिंता: राजस्थान में 40 खेलों के लिए मात्र 50 कोच उपलब्ध जबकि जरूरत 1700 की
देश भर में राष्ट्रीय खेल दिवस का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन खेल के मैदानों की जमीनी हकीकत कई गंभीर सवाल खड़े करती है। राजस्थान जैसे विशाल राज्य में खेल प्रतिभाओं को सही दिशा देने और उन्हें निखारने वाले गुरुओं यानी द्रोणाचार्य जैसे प्रशिक्षकों की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। एक तरफ जहां राज्य के युवा खिलाड़ियों में खेलों के प्रति रुझान लगातार बढ़ रहा है और वे विभिन्न मंचों पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी और पेशेवर मार्गदर्शन के अभाव में कई बार उनकी प्रतिभा बीच में ही दम तोड़ देती है।

कोचिंग स्टाफ की भारी कमी

खेल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यभर में लगभग 40 अलग-अलग खेलों का संचालन किया जाता है, जिनके लिए खिलाड़ियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की जिम्मेदारी होती है। हैरानी की बात यह है कि इन तमाम चालीस खेल विधाओं के प्रशिक्षण का जिम्मा उठाने के लिए वर्तमान में कुल मिलाकर केवल 50 नियमित कोच ही फील्ड पर तैनात हैं। इसके विपरीत, विभागीय आकलन और खेल संघों की मांग के अनुसार राज्य में तत्काल प्रभाव से कम से कम 1700 कोचों की आवश्यकता है। प्रशिक्षकों का यह विशाल अंतर इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किस प्रकार हमारे उभरते हुए अर्जुन बिना द्रोणाचार्य के आगे बढ़ने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को पेशेवर और वैज्ञानिक प्रशिक्षण नहीं मिलेगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की उम्मीदों को पंख नहीं लग सकते। राज्य के कई जिलों में खेल अकादमियां और स्टेडियम तो बना दिए गए हैं, लेकिन वहां प्रशिक्षित कोचों की अनुपस्थिति के कारण वे सुविधाएं केवल इमारतों तक ही सीमित होकर रह गई हैं। युवा खिलाड़ियों को अपनी खेल शैली में सुधार करने, फिटनेस बनाए रखने और खेल की बारीकियों को सीखने के लिए अनुभवी गुरुओं की सख्त जरूरत होती है, जो फिलहाल अधिकांश स्थानों पर उपलब्ध नहीं हैं।

भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें

इस गंभीर समस्या को लेकर खेल प्रेमियों और विभिन्न खेल संघों द्वारा लगातार आवाज उठाई जा रही है। यदि आने वाले समय में सरकार और खेल मंत्रालय द्वारा बड़े पैमाने पर कोचों की भर्ती प्रक्रिया को तेज नहीं किया गया, तो आने वाली युवा पीढ़ी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। राष्ट्रीय खेल दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर केवल उत्सव मनाने के बजाय इस प्रकार की संरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिए ठोस रणनीतिक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि राजस्थान के खेल भविष्य को एक नई और मजबूत दिशा मिल सके।
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