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खेल मैदान की कमी: सिकंदरपुर और अकबरपुर ब्लॉक के युवाओं को अभ्यास में आ रही भारी परेशानी

उत्तर प्रदेश के अकबरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सिकंदरपुर क्षेत्र में खेल मैदानों की भारी कमी के कारण स्थानीय युवाओं और बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 15:29
खेल मैदान की कमी: सिकंदरपुर और अकबरपुर ब्लॉक के युवाओं को अभ्यास में आ रही भारी परेशानी
उत्तर प्रदेश के खेल जगत और स्थानीय युवाओं के विकास से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अकबरपुर ब्लॉक के सिकंदरपुर इलाके में खेलकूद के लिए उचित मैदानों की अनुपलब्धता के कारण बच्चों और उभरते हुए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और नियमित अभ्यास करने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के चलते क्षेत्र की छिपी हुई खेल प्रतिभाएं समय से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव

खेलकूद किसी भी युवा के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है, लेकिन सिकंदरपुर और उसके आसपास के ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी इलाकों में खेल के मैदानों का पूरी तरह से अकाल पड़ा हुआ है। बच्चे और युवा रोजाना अभ्यास करने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में भटकते रहते हैं, परंतु उन्हें खाली या सुरक्षित जमीन नहीं मिल पाती है। इसके अभाव में वे सड़क किनारे या तंग गलियों में ही खेलने को मजबूर हैं, जिससे हमेशा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। स्थानीय अभिभावकों और खेल प्रेमियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को कई बार संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाने का प्रयास किया है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम देखने को नहीं मिला है। खेल मैदान न होने के कारण न केवल बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनका रुझान भी खेलों की तरफ से कम होने लगा है। यदि समय रहते इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले समय में इस क्षेत्र से कोई भी प्रतिभावान खिलाड़ी राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पाएगा।

प्रशासनिक उदासीनता और भविष्य की चिंताएं

युवाओं का भविष्य संवारने के दावे तो बड़े-बड़े मंचों से किए जाते हैं, परंतु जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती हुई नजर आती है। अकबरपुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों और सिकंदरपुर क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विकास के लिए अब तक किसी भी प्रकार की विशेष कार्ययोजना लागू नहीं की जा सकी है। खेल मैदानों के अभाव में न केवल क्रिकेट, फुटबॉल या हॉकी जैसी पारंपरिक खेल विधाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि एथलेटिक्स और अन्य शारीरिक गतिविधियों का अभ्यास करने वाले बच्चे भी निराश होकर घर बैठने को विवश हो रहे हैं। खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जल्द से जल्द सरकारी भूमि को चिन्हित कर वहां एक आधुनिक खेल परिसर या मैदान का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। जब तक युवाओं को खेलने के लिए सुरक्षित और सुसज्जित मैदान नहीं मिलेंगे, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का सपना अधूरा ही रहेगा। अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रनिधि इस गंभीर मुद्दे पर कब अपनी नींद तोड़ते हैं और बच्चों के हित में क्या कदम उठाते हैं।
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