लखनऊ में पुराना खेल मैदान
लखनऊ जिले के भीतर खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए बना एक मुख्य खेल मैदान अब अपनी बदहाली के कारण चर्चा में आ गया है। इस मैदान को बने हुए पूरे दस साल से अधिक का समय बीत चुका है और समय के साथ इसका रखरखाव ठीक प्रकार से नहीं किया गया है। मैदान पर बिछाया गया विशेष प्रकार का टर्फ अपनी शुरुआती पकड़ और चमक खो चुका है, जिससे वहां आने वाले हर खिलाड़ी को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेल गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस स्थल पर रोजाना बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ी पसीना बहाने आते हैं। लेकिन मैदान की मौजूदा भौतिक स्थिति ऐसी हो चुकी है कि वहां पैर रखना भी सुरक्षित नहीं बचा है। इस टर्फ के ऊपर दौड़ते समय खिलाड़ियों के पैर लगातार फिसलते हैं, जिससे उनके करियर पर हमेशा चोटिल होने का गंभीर खतरा मंडराता रहता है। स्थानीय खेल जगत से जुड़े लोगों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है क्योंकि शहर के भीतर अभ्यास के लिए सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं।
खिलाड़ियों की बढ़ती हुई मुश्किलें
खेल अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों को आने वाली कठिनाइयों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है क्योंकि सतह पर पकड़ बिल्कुल समाप्त हो चुकी है। इस पुराने टर्फ पर हॉकी स्टिक के साथ ड्रिबलिंग करना या तेजी से दौड़ना अब किसी बड़े जोखिम से कम नहीं माना जाता है। मैदान की इस जर्जर स्थिति की वजह से खिलाड़ियों को अपने खेल का स्तर सुधारने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। युवा खिलाड़ियों का कहना है कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें हर पल गिरने और गंभीर चोट लगने का डर सताता रहता है। कई उभरती हुई प्रतिभाएं इस मैदान की खराबी के कारण अभ्यास से दूरी भी बनाने लगी हैं, जो स्थानीय खेल के भविष्य के लिए एक चिंताजनक संकेत है। खेल प्रशिक्षण के दौरान कोचों को भी अपने खिलाड़ियों को अभ्यास कराते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ती है ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। मैदान पर जगह-जगह से टर्फ उखड़ने लगा है और उसका समतलपन भी पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, जिससे गेंद की गति भी अनियंत्रित हो जाती है। इस प्रकार की बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लखनऊ के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह तैयार होने में पिछड़ रहे हैं।
मैदान सुधार की पुरानी पृष्ठभूमि
खेल के बुनियादी ढांचे से जुड़ी इस तरह की समस्याएं आमतौर पर लंबे समय तक रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण पैदा होती हैं। किसी भी खेल के मैदान के लिए यह बेहद जरूरी होता है कि उसकी सतह को समय-समय पर बदला जाए ताकि खेल की गुणवत्ता बनी रहे। खेल विज्ञान के जानकारों के अनुसार कृत्रिम टर्फ की एक निश्चित उम्र होती है जिसके बाद उसे पूरी तरह से नया किया जाना अनिवार्य हो जाता है। एक दशक पुराना होने के कारण यह टर्फ अपनी मूल विशेषताओं को खो चुका है और मौसम की मार के कारण इसका क्षरण बहुत तेजी से हुआ है। शहर के खेल संघों और वरिष्ठ खिलाड़ियों ने अतीत में भी कई बार खेल सुविधाओं के आधुनिकीकरण की मांग उठाई है ताकि प्रतिभाओं को सही मंच मिल सके। इस प्रकार के पुराने और जर्जर मैदानों पर खेलने से न केवल खेल का स्तर गिरता है बल्कि खिलाड़ियों का मनोबल भी कम होता है। खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लखनऊ की खेल प्रतिभाएं मुख्यधारा से पिछड़ सकती हैं। आने वाले दिनों में खेल प्रशासन से यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस पुराने मैदान की सुध लेंगे और इसे खेलने योग्य बनाने के लिए नया टर्फ लगवाने की दिशा में तेजी से काम करेंगे।