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खेल मैदानों की लाचारी: महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा उचित मार्गदर्शन
महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में युवा खिलाड़ी मैदान पर कठिन परिश्रम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें तकनीकी और रणनीतिक ज्ञान देने वाला कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं है।
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Ankit Yadav
02 सित 2026, 16:13
महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में इन दिनों एक बेहद चिंताजनक स्थिति बनी हुई है, जहाँ भविष्य के उभरते हुए खिलाड़ी खेल के मैदानों पर अपनी फिटनेस और कौशल को सुधारने के लिए कड़ा पसीना बहा रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक पसीना बहाने वाले इन युवा खिलाड़ियों के जज्बे में कोई कमी नहीं है, लेकिन उनके साथ सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उनकी प्रतिभा को सही दिशा देने के लिए मैदान पर कोई तकनीक या रणनीति सिखाने वाला शिक्षक या कोच उपलब्ध नहीं है। बिना किसी पेशेवर मार्गदर्शन के ये खिलाड़ी खुद ही अपने स्तर पर अभ्यास करने को मजबूर हैं, जिससे उनके खेल के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की कमी से भविष्य दांव पर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रतिष्ठित शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थान में लगातार खेल प्रशिक्षकों और विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हुए हैं या फिर वे अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से निभाने के लिए मैदान पर मौजूद नहीं रह पाते हैं। जब भी कोई युवा खिलाड़ी किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की तैयारी करता है, तो उसे आधुनिक तकनीकों, सही पॉश्चर, खेल की बारीकियों और मैच की रणनीतियों की गहरी समझ की आवश्यकता होती है। लेकिन महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में ऐसी किसी भी प्रकार की सुविधा का अभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है, जहाँ खिलाड़ी बिना किसी तकनीकी सहायता के सिर्फ अपनी शारीरिक मेहनत के भरोसे मैदान में अभ्यास कर रहे हैं।
भविष्य की खेल प्रतिभाओं को तराशने के उद्देश्य से स्थापित किए गए ऐसे स्पोर्ट्स कॉलेजों में इस तरह की बुनियादी और गंभीर समस्याओं का होना खेल प्रेमियों और अभिभावकों के लिए गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती दौर में ही खिलाड़ियों को सही रणनीतिक ज्ञान और तकनीकी प्रशिक्षण न मिले, तो उनकी प्रतिभा बीच में ही कुंठित हो जाती है और वे बड़े मंचों पर बेहतर प्रदर्शन करने से चूक जाते हैं। मैदान पर खिलाड़ियों का पसीना बहाना तभी सार्थक हो सकता है जब उनके पीछे एक अनुभवी कोच का मार्गदर्शन हो, जो उनकी कमियों को दूर करके उन्हें एक परिपक्व खिलाड़ी के रूप में ढाल सके।
प्रशासनिक उदासीनता और आगे की राह
इस पूरे मामले को लेकर खेल जगत से जुड़े हलकों और स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। जानकारों का कहना है कि संबंधित खेल विभाग और कॉलेज प्रशासन को इस गंभीर स्थिति का तुरंत संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से योग्य कोचों और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति करनी चाहिए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो न केवल इन होनहार खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक जाएगा, बल्कि इस प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा को भी भारी ठेस पहुंचेगी। उम्मीद की जा रही है कि मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे और जल्द ही मैदान पर खिलाड़ियों को उनका हक का मार्गदर्शन मिलने लगेगा ताकि उनकी मेहनत रंग ला सके।