स्वर्ण पदक विजेता की बड़ी मांग
मंडी जिले के गोहर क्षेत्र के मलोट गांव की रहने वाली भावना ठाकुर ने हाल ही में समाप्त हुए एशियाई खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है। चीनी ताइपे और ईरान जैसी मजबूत टीमों को कड़ी टक्कर देने के बाद भारतीय महिला कबड्डी टीम ने फाइनल मुकाबले में शानदार जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इस महामुकाबले में भावना ठाकुर ने करीब 15 मिनट तक मैदान पर टिककर अपनी टीम के पक्ष में महत्वपूर्ण अंक जुटाए थे। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों को कई कठिन पलों का सामना करना पड़ा था लेकिन टीम के सभी सदस्यों ने एकजुटता का परिचय देते हुए हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया। कप्तान पुष्पा राणा के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश की चारों खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही स्वर्ण पदक हासिल करने का पक्का इरादा कर लिया था। सभी खिलाड़ियों ने आपसी तालमेल और बेहतरीन रणनीति के जरिए हर मैच में अपनी सर्वश्रेष्ठ खेल क्षमता का प्रदर्शन किया। अंततः सभी बाधाओं को पार करते हुए भारतीय महिला टीम ने पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल कर देश की झोली में बहुमूल्य स्वर्ण पदक डाल दिया। भावना के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े मंच पर मेडल जीतना उनके लंबे संघर्ष और कड़ी मेहनत का सुखद परिणाम है।
कम पुरस्कार राशि पर जताई नाराजगी
अंतरराष्ट्रीय खेल महाकुंभ में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद हिमाचल की बेटी ने प्रदेश सरकार की खेल नीति पर असंतोष व्यक्त किया है। प्रदेश सरकार की ओर से नई खेल नीति के अंतर्गत पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए केवल 33 लाख रुपये की पुरस्कार राशि तय की गई है। भावना ठाकुर का स्पष्ट मानना है कि अन्य खेलों के पदक विजेताओं की तुलना में कबड्डी खिलाड़ियों को मिलने वाली यह राशि बेहद कम है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष इस विषय को प्रमुखता से उठाने और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। भावना का कहना है कि हिमाचल से ताल्लुक रखने वाली चारों कबड्डी खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की सफलता में बहुत बड़ा योगदान दिया है। इसलिए राज्य सरकार को भेदभाव समाप्त कर सभी चारों खिलाड़ियों को समान रूप से एक-एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान करनी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि खिलाड़ियों की ओर से किए जाने वाले कड़े संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश तथा प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के स्तर को देखते हुए ही सम्मान राशि तय होनी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने सरकार से पुनर्विचार करने और खिलाड़ियों की मेहनत के अनुपात में वित्तीय प्रोत्साहन बढ़ाने की जोरदार वकालत की है।
सुरक्षित भविष्य के लिए सरकारी नौकरी
वित्तीय पुरस्कार राशि के साथ-साथ भावना ठाकुर ने खिलाड़ियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए स्थायी रोजगार की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई है। उनका तर्क है कि किसी भी खिलाड़ी के खेल करियर की अवधि बहुत सीमित होती है और युवावस्था के कुछ साल ही खेल के नाम होते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के लिए आजीविका का ठोस साधन होना बेहद जरूरी है। पक्की सरकारी नौकरी मिलने से खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो जाता है और वे बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह से खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। भावना ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इस गंभीर मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए खिलाड़ियों की इन दोनों प्रमुख मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। एशियाई खेलों की इस बड़ी सफलता के बाद अब उनका पूरा ध्यान आने वाली आगामी प्रतियोगिताओं में भी अपने शानदार प्रदर्शन को लगातार जारी रखने पर है। वह चाहती हैं कि सरकार खिलाड़ियों की खेल उपलब्धियों और उनके अमूल्य योगदान का उचित सम्मान करे ताकि आने वाली पीढ़ी के युवा भी खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकें। इस पूरी मुहिम से राज्य के अन्य खिलाड़ियों को भी अपनी आवाज बुलंद करने का एक नया हौसला मिला है।