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खेल संवाद: ओलंपिक में भारत के पिछड़ने की पीएम मोदी ने बताई कड़वी सच्चाई
खेल इंडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक खेलों में भारतीय एथलीटों के पिछड़ने के कारणों पर खुलकर बात की और मेडल जीतने की संख्या बढ़ाने के लिए जरूरी मंत्र दिए।
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Ankit Yadav
27 अग 2026, 19:22
देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने और एथलीटों के प्रदर्शन को अगले स्तर पर ले जाने के लिए आयोजित 'खेलो इंडिया संवाद' के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए। उन्होंने देश के सामने खेल जगत की उस कड़वी सच्चाई को रखा जिसके कारण ओलंपिक जैसे बड़े वैश्विक मंचों पर भारत अपनी पूरी क्षमता के अनुसार पदक जीतने में पीछे रह जाता है। प्रधानमंत्री ने केवल कमियों को ही उजागर नहीं किया, बल्कि आने वाले समय में खेल के मैदान पर भारत का दबदबा बढ़ाने और पदकों की संख्या में भारी इजाफा करने का एक स्पष्ट मंत्र भी देश के खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों को सौंपा।
खेल संस्कृति और जमीनी बदलाव
उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि खेल के क्षेत्र में केवल शीर्ष स्तर पर बदलाव करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर आधारभूत ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। देश के छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों से प्रतिभाओं को तलाशकर उन्हें सही समय पर आधुनिक प्रशिक्षण देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। जब तक खेल को सिर्फ एक शौक की बजाय करियर और राष्ट्रीय गौरव के रूप में नहीं देखा जाएगा, तब तक ओलंपिक के पोडियम पर भारत का तिरंगा उस संख्या में नहीं लहरा पाएगा जितनी विशाल हमारी आबादी और क्षमता है। इस संवाद के दौरान खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच इस बात की भी चर्चा रही कि कैसे लखनऊ और अन्य राज्यों के खेल अकादमियों में इन नीतियों को लागू किया जा रहा है।
विशेषज्ञों और खेल प्रेमियों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए इन मंत्रों से देश के युवा खिलाड़ियों में एक नया उत्साह संचारित होगा। लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि भारतीय एथलीटों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों, पोषण, और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानसिक प्रशिक्षण की कमी के कारण वे मामूली अंतर से पदक चूक जाते हैं। सरकार की ओर से लगातार 'खेलो इंडिया' अभियान के जरिए जमीनी स्तर पर माहौल बदला जा रहा है, और इस संवाद ने उस दिशा में और तेजी लाने का काम किया है।
आने वाले दिनों में खेल मंत्रालय और विभिन्न खेल महासंघों द्वारा इन दिशा-निर्देशों के आधार पर अपनी रणनीतियों को और अधिक धार दिए जाने की उम्मीद है। देश भर के खेल परिसरों में, विशेषकर उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली जैसे प्रमुख केंद्रों पर, इन बदलावों को जमीन पर उतारने के लिए नए खाके तैयार किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों से लेकर कोचों तक, हर कोई यह मान रहा है कि यदि प्रधानमंत्री के इन सुझावों पर पूरी निष्ठा से अमल किया गया, तो आगामी ओलंपिक आयोजनों में भारत की झोली में पदकों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी और देश वैश्विक खेल मानचित्र पर एक महाशक्ति के रूप में उभरेगा।