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खेलों का पावरहाउस: हरियाणा का दबदबा होने के बावजूद क्यों नहीं मिली 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी

खेल जगत में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाले हरियाणा राज्य का खेल प्रतियोगिताओं और पदकों में हमेशा से दबदबा रहा है, लेकिन इसके बाद भी 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Kantap News डेस्क
15 अग 2026, 17:50
खेलों का पावरहाउस: हरियाणा का दबदबा होने के बावजूद क्यों नहीं मिली 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी
भारतीय खेल परिदृश्य में हरियाणा को हमेशा से एक नर्सरी और पावरहाउस के रूप में देखा जाता है। देश के लिए ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले खिलाड़ी इसी राज्य से आते हैं। स्थानीय स्तर पर खेल संस्कृति और सरकार की नीतियों ने इसे भारतीय खेलों का केंद्र बना दिया है। बावजूद इसके, जब आगामी 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की बात आई, तो इस अग्रणी राज्य को यह अवसर हासिल नहीं हो सका, जिसने खेल प्रेमियों और विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

मेजबानी मिलने के पीछे के कारण

खेलों में अग्रणी होने के बावजूद किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी मिलना केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए बुनियादी ढांचे, अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियमों, परिवहन व्यवस्था, वित्तीय संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों के राजनीतिक समीकरणों जैसी कई अन्य महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना होता है। केवल पदकों की संख्या के आधार पर मेजबानी के अधिकार नहीं मिलते, बल्कि इसके लिए व्यापक प्रशासनिक और ढांचागत तैयारियों की आवश्यकता होती है, जो कई बार बड़े राज्यों के सामने भी बड़ी चुनौतियां खड़ी कर देती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में इस तरह के बड़े वैश्विक आयोजनों को आकर्षित करने के लिए केवल खेल प्रतिभाओं पर निर्भर रहने के बजाय विश्व स्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाओं का विकास करना बेहद जरूरी होगा। हरियाणा के एथलीटों का प्रदर्शन भले ही बेजोड़ रहा हो, लेकिन मेजबानी की दौड़ में सफल होने के लिए बहुपक्षीय मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य है।
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