मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में हुई विशेष मुलाकात
देश की राजधानी दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आइची नागोया शहर में आयोजित हुए एशियाई खेल 2026 के सभी पदक विजेताओं के साथ मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से सभी खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें देश का गौरव करार दिया। इस मुलाकात के दौरान देश भर से पहुंचे विभिन्न खेल विधाओं के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में भारी उत्साह देखने को मिला जिन्होंने इस आयोजन को बेहद यादगार बताया। कार्यक्रम में पहुंचे सभी एथलीटों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और देश में खेल सुविधाओं के विस्तार पर भी अपनी बात रखी। इस दौरान स्टेडियम का पूरा माहौल उत्साह और राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत नजर आया जहां देश के शीर्ष एथलीटों का अभिनंदन किया गया।
क्रिकेट टीमों की मौजूदगी और विशेष उपहार
इस प्रतिष्ठित सम्मान समारोह में देश की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों की विशेष रूप से मौजूदगी रही जिसने सबका ध्यान आकर्षित किया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल करने वाली पुरुष टी-20 क्रिकेट टीम इस आयोजन का हिस्सा बनी। इसके अलावा हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना के नेतृत्व और मार्गदर्शन में खेलने वाली महिला क्रिकेट टीम ने भी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। खिलाड़ियों ने आदरस्वरूप प्रधानमंत्री को कई यादगार भेंट प्रदान की जिसमें हस्ताक्षर की गई एक विशेष जर्सी भी शामिल थी। महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने स्वर्ण पदक विजेता पूरी टीम के हस्ताक्षर वाली जर्सी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आदरपूर्वक सौंपी। इस दौरान जानी-मानी खिलाड़ी स्मृति मंधाना ने भी प्रधानमंत्री के साथ कैमरे के सामने तस्वीरें खिंचवाईं और इस पल को संजोया। क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों से जुड़े पदक विजेताओं ने भी प्रधानमंत्री को अपनी खेल यात्रा से जुड़े विभिन्न संस्मरण और उपहार भेंट किए।
खेलों के बदलते माहौल और भविष्य की योजना
देश के खेल ढांचे पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि कोई भी बड़ा सपना या मजबूत संकल्प एक दिन में पूरा नहीं होता है। इसके पीछे लंबी अवधि की कठिन मेहनत, पक्का इरादा और निरंतर समर्पण की गहरी आवश्यकता होती है। बीते पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत ने भारी धैर्य का परिचय देते हुए देश के भीतर खेलों का एक मजबूत और आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है। पुराने समय की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब बड़े वैश्विक आयोजनों में देश के खिलाड़ी बहुत कम संख्या में ही पदक जीत पाते थे। उस समय स्थिति यह थी कि देश के आम नागरिकों को कई खेलों के बारे में कोई खास जानकारी या जागरूकता भी नहीं थी। इसी पुरानी निराशावादी सोच को जड़ से बदलने का मजबूत संकल्प लिया गया जिसके परिणाम आज सबके सामने हैं। वैश्विक खेल मंच पर अब भारत की भागीदारी और पदक जीतने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खेलों के क्षेत्र में अब एक पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था स्थापित कर दी गई है जो उभरते हुए खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के बेहतर और निष्पक्ष अवसर मुहैया कराती है।