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मैदान की बदहाली: सासाराम के धौडाड स्कूल का खेल मैदान हुआ बदहाल, बड़ी दरारें पड़ने से जमा हुआ पानी
बिहार के सासाराम स्थित धौडाड स्कूल का खेल मैदान इन दिनों बदहाली के आंसू रो रहा है, जहाँ रखरखाव के अभाव में जमीन पर बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं और पानी जमा होने से विद्यार्थियों तथा स्थानीय खेल प्रेमियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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Ankit Yadav
23 अग 2026, 15:42
बिहार के रोहतास जिले के अंतर्गत आने वाले सासाराम क्षेत्र से शिक्षा और खेल सुविधाओं की बदहाली से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहाँ स्थित धौडाड स्कूल का खेल मैदान प्रशासनिक उदासीनता और उचित देखभाल के अभाव में पूरी तरह जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। कभी छात्र-छात्राओं की चहल-पहल और खेलकूद से गुलजार रहने वाला यह परिसर आज उपेक्षा का शिकार बन गया है। मैदान की मौजूदा स्थिति ऐसी हो गई है कि यहाँ सामान्य गतिविधियां चलाना भी जोखिम भरा साबित हो रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं और स्कूल के विद्यार्थियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
मैदान में पड़ी गहरी दरारें और जलभराव
स्थानीय रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धौडाड स्कूल के इस खेल मैदान की जमीन पर जगह-जगह चौड़ी और गहरी दरारें विकसित हो चुकी हैं। इसके अलावा, जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश या अन्य कारणों से इकट्ठा होने वाला पानी इसी मैदान में जमा रहता है। नतीजतन, यह पूरा इलाका किसी दलदल या तालाब जैसा नजर आने लगता है। बच्चों के खेलने के लिए बने इस प्रमुख स्थान पर पानी भर जाने और जमीन फटने के कारण छात्रों के लिए दौड़ना, कूदना या किसी भी प्रकार का खेल खेलना पूरी तरह असंभव हो गया है। इससे शारीरिक शिक्षा और खेल गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि खेलकूद किसी भी छात्र के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद आवश्यक है, लेकिन आधारभूत सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। स्कूल प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते खेल के मैदानों की सुध नहीं ली जा रही है, जिससे इस प्रकार की विकट समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे नागरिकों में प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है।
खेल प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने अब जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उनकी मांग है कि जल्द से जल्द मैदान की मिट्टी के भराव का काम कराया जाए, जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित हो और दरारों को भरकर इसे फिर से खेलने योग्य बनाया जाए। यदि समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह मैदान पूरी तरह नष्ट हो जाएगा और बच्चों के पास खेलकूद के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचेगा।