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नया नियम लागू: स्टेडियम में खेल प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के संचालन के लिए अब लेनी होगी अनुमति

उत्तर प्रदेश सहित देश भर के खेल प्रेमियों और आयोजकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अब स्टेडियम परिसरों के भीतर किसी भी तरह के खेल प्रशिक्षण सत्र या प्रतियोगिताओं का आयोजन करने से पहले संबंधित अधिकारियों से औपचारिक अनुमति लेनी अनिवार्य कर दी गई है। इस नए प्रशासनिक निर्देश का उद्देश्य खेल परिसरों की सुरक्षा, प्रबंधन और व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

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Ankit Yadav
16 सित 2026, 13:22
नया नियम लागू: स्टेडियम में खेल प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के संचालन के लिए अब लेनी होगी अनुमति
खेल गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए संबंधित खेल प्रशासन ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब किसी भी सार्वजनिक या सरकारी स्टेडियम के मैदान में खिलाड़ियों को कोचिंग देने, खेल प्रशिक्षण शिविर चलाने अथवा किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने के लिए पहले से अनुमति पत्र प्राप्त करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से स्टेडियमों में होने वाली गतिविधियों पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी और सुविधाओं का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।

प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासन

हाल के दिनों में देश के कई प्रमुख खेल परिसरों और स्टेडियमों में अनियोजित गतिविधियों और भीड़भाड़ की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से राजधानी लखनऊ जैसे बड़े शहरों में खेल अकादमियों और स्थानीय आयोजकों द्वारा बिना पूर्व सूचना के बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे थे, जिससे कई बार मुख्य खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास में बाधा उत्पन्न होती थी। इस नई प्रक्रिया के शुरू होने से न केवल समय सारणी का उचित प्रबंधन होगा, बल्कि खेल सुविधाओं का लाभ उठाने वाले सभी पक्षों के लिए एक स्पष्ट नियम पुस्तिका भी तैयार हो सकेगी।

आयोजकों और कोचों की बढ़ी जिम्मेदारी

इस नए आदेश के बाद खेल प्रशिक्षण देने वाले कोचों और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजकों की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। उन्हें अब किसी भी कार्यक्रम की रूपरेखा, प्रतिभागियों की संख्या और निर्धारित समय की पूरी जानकारी संबंधित स्टेडियम प्रबंधन को लिखित रूप में देनी होगी। अनुमति मिलने के पश्चात ही वे निर्धारित क्षेत्र का उपयोग कर पाएंगे। ऐसा न करने पर खेल परिसरों में प्रवेश पर रोक या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। स्थानीय खेल संघों और खेल प्रेमियों की ओर से इस नीति को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां कुछ लोग इसे अनुशासन के लिए जरूरी मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे प्रशासनिक औपचारिकता बता रहे हैं। भविष्य में इस नियम के और अधिक कड़ाई से पालन किए जाने की उम्मीद है। खेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य क्षेत्रों के खेल ढांचे में सुधार आएगा और युवा प्रतिभाओं को अभ्यास के लिए एक सुरक्षित तथा व्यवस्थित माहौल मिल सकेगा। आयोजकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी नए सत्र या टूर्नामेंट की शुरुआत से काफी पहले अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
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