अंतिम शॉट तक चला कांटे का मुकाबला
शूटिंग रेंज पर आज का दिन भारत के लिए बेहद यादगार साबित हुआ। महिला ट्रैप फाइनल में नीरू ढांढा ने शुरुआत से ही अचूक निशानेबाजी का मुजाहिरा किया। 50 शॉट्स के कड़े फाइनल में उन्होंने 46 निशाने बिल्कुल सही साधे। प्रतिद्वंद्वी चीनी और जापानी निशानेबाजों के कड़े दबाव के बावजूद नीरू ने अपना संयम नहीं खोया और अंतिम दो लक्ष्यों को सटीक तरीके से ध्वस्त करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया।
अस्पताल के बिस्तर से पोडियम के शीर्ष तक का सफर
नीरू ढांढा की यह जीत इसलिए भी अभूतपूर्व है क्योंकि खेलों की तैयारी के दौरान वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। टूर्नामेंट से ठीक तीन सप्ताह पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था जहां डॉक्टरों ने उन्हें लंबे आराम की सलाह दी थी। लेकिन अपने अटूट जज्बे और कठिन परिश्रम के दम पर उन्होंने न केवल वापसी की बल्कि देश के लिए ऐतिहासिक पदक भी सुनिश्चित किया। उनके इस संघर्ष की कहानी अब लाखों युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा बन गई है।
भारतीय निशानेबाजी दल में जश्न और राष्ट्रीय पहचान
नीरू की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से भारतीय निशानेबाजी महासंघ और खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। अनुभवी निशानेबाजों और पूर्व ओलंपिक पदक विजेताओं ने सोशल मीडिया पर नीरू को बधाई दी है। इस पदक के साथ ही भारत ने निशानेबाजी में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के रिकॉर्ड को भी पार कर लिया है। आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक खेलों के लिए भी नीरू की यह फॉर्म बेहद उत्साहजनक मानी जा रही है।