मनीष नरवाल का परिचय और खेल सफर
खेलों की दुनिया में हरियाणा का विशेष स्थान माना जाता है और यहीं के बल्लभगढ़ में 17 अक्टूबर 2001 को मनीष नरवाल का जन्म हुआ था। उनके परिवार में खेलों का माहौल पहले से मौजूद था क्योंकि उनके पिता एक पहलवान रह चुके थे और उनके दो भाई भी निशानेबाजी के खेल से जुड़े हुए थे। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें अपने करियर को आगे बढ़ाने में किसी भी तरह की घरेलू रुकावट का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने केवल 15 वर्ष की आयु में ही एक निशानेबाज के रूप में अपनी खेल यात्रा की शुरुआत कर दी थी। वह मुख्य रूप से पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 श्रेणी की स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं। कोच जय प्रकाश नौटियाल के मार्गदर्शन में उन्होंने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था। वर्ष 2017 में बैंकॉक में आयोजित विश्व कप के दौरान उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। उस प्रतियोगिता के पी1-10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 इवेंट में उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया बल्कि क्वालीफिकेशन राउंड और फाइनल मुकाबले में नया जूनियर विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन
वैश्विक स्तर पर भारतीय एथलीटों और पैरा एथलीटों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का गौरव लगातार बढ़ाया है। चाहे मंच ओलंपिक का हो, राष्ट्रमंडल खेलों का हो या एशियाई खेलों का, हमारे देश के निशानेबाजों ने हमेशा शानदार प्रदर्शन किया है। इसी कड़ी में पैरा निशानेबाजी के क्षेत्र में मनीष नरवाल ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने विभिन्न विश्व कप प्रतियोगिताओं और चैंपियनशिप मुकाबलों में कई अन्य पदक भी अपने देश की झोली में डाले हैं। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित 2018 एशियाई पैरा खेलों के दौरान उन्होंने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। उन्होंने पी1-पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा और पी4-मिश्रित 50 मीटर फ्री पिस्टल स्पर्धा में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था। इन लगातार सफलताओं के बाद एक स्टार पैरा शूटर के रूप में उनकी ख्याति पूरी दुनिया में और अधिक मजबूत हो गई थी। विभिन्न महाद्वीपों और देशों में आयोजित होने वाली इन प्रतियोगिताओं में उनके लगातार पदकों ने भारतीय पैरा खेल जगत को एक नई ऊंचाई प्रदान की और उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया।
पैरालंपिक की सफलता और बड़े पुरस्कार
इस युवा पैरा पिस्तौल शूटर के खेल करियर का सबसे बड़ा गौरवशाली क्षण टोक्यो पैरालंपिक खेलों के दौरान आया जब उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने पेरिस पैरालंपिक खेलों में भी शानदार खेल दिखाते हुए 10 मीटर स्पर्धा में रजत पदक देश के नाम किया। शूटिंग के इस खेल में उनके अभूतपूर्व प्रदर्शन और खेल के विकास में दिए गए उनके बहुमूल्य योगदान को पूरी तरह से मान्यता मिली है। उनकी इन महान उपलब्धियों का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के साथ-साथ अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा है। हरियाणा की खेल संस्कृति और स्थानीय युवाओं के लिए उनके जैसे खिलाड़ी एक बहुत बड़ा आदर्श बन चुके हैं जिन्हें अपनी प्रेरणा के लिए कहीं और देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उनके द्वारा स्थापित किए गए ये कीर्तिमान आने वाली पीढ़ी के पैरा खिलाड़ियों को अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का तिरंगा ऊंचा लहराने के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।