स्टेडियम में सफाई और सुधार कार्य
फरीदाबाद के दयालपुर गांव में स्थित खेल स्टेडियम की कायापलट करने के उद्देश्य से एक व्यापक सफाई अभियान का संचालन किया जा रहा है। पिछले काफी समय से इस मैदान की स्थिति बेहद खराब थी और वहां जगह-जगह ऊंची घास उग आई थी, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब इस मैदान के सुंदरीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत सबसे पहले मैदान में फैली अनचाही झाड़ियों और घास को काटा जा रहा है। इसके अलावा, खेल के ट्रैक को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। स्टेडियम के जर्जर गेट की मरम्मत करने का भी निर्णय लिया गया है ताकि परिसर को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाया जा सके। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों का संयुक्त प्रयास है कि कबड्डी के खेल के लिए यहां एक अलग और समर्पित मैदान तैयार किया जाए, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतर मौका मिल सके।
प्रशासनिक पहल और ग्रामीणों की भागीदारी
दयालपुर गांव के सरपंच प्रतिनिधि देवेंद्र सिंह के अनुसार, सरकारी बजट सीमित होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर सहयोग जुटाकर इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। गांव के निवासी दीपक और पदम सिंह जैसे लोगों ने इस सफाई अभियान की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से स्टेडियम की अनदेखी की जा रही थी, लेकिन अब हालात सुधरने लगे हैं। पदम सिंह का मानना है कि खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना गांव के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहीं, बबलू हुड्डा ने विकास कार्यों में ईमानदारी और जिम्मेदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया ताकि धरातल पर बदलाव नजर आए। गांव की सामाजिक संस्थाओं ने भी इस सफाई कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई है। खिलाड़ियों के साथ-साथ गांव के बुजुर्ग और महिलाएं भी इस साफ-सुथरे मैदान का लाभ उठा सकेंगे, जिससे गांव में खेल और स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक माहौल तैयार होगा। यह पहल अब फरीदाबाद जिले के इस ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
खिलाड़ियों की उपलब्धि और भविष्य की राह
दयालपुर गांव का खेल इतिहास काफी गौरवशाली रहा है, जहां से जूडो, तीरंदाजी और कबड्डी के कई प्रतिभावान खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। रेलवे में चीफ जूडो कोच के रूप में कार्यरत और एशियन गेम्स व वर्ल्ड कप के अनुभवी खिलाड़ी परविंदर हुड्डा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में इसी मैदान पर कठिन अभ्यास किया था। आज भी इस स्टेडियम में एक छोटी अकादमी चल रही है, जहां बच्चे खेल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस ग्राउंड में आधारभूत ढांचा और बेहतर सुविधाएं बढ़ा दी जाएं, तो यहां के प्रतिभावान बच्चे और भी बड़े पदक जीत सकते हैं। खिलाड़ियों की उपलब्धियों के मुकाबले उन्हें मिलने वाली सुविधाएं अभी भी कम हैं, जिसे बढ़ाने की सख्त जरूरत है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकारी ग्रांट की पर्याप्त उपलब्धता और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि दयालपुर के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाएं मिल सकें।