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संकल्प पत्रों में खेल गायब: क्या भविष्य में तैयार हो पाएंगी नई खेल प्रतिभाएं?
देश और राज्यों के विभिन्न घोषणा पत्रों व संकल्प पत्रों से खेलों की अनदेखी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे खेल प्रेमियों और जानकारों में चिंता का माहौल है।
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Ankit Yadav
11 सित 2026, 14:31
भारतीय राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में जब भी बड़े घोषणा पत्र या संकल्प पत्र सामने आते हैं, तो उनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से जगह मिलती है। हालांकि, इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों में अक्सर खेलकूद और खिलाड़ियों के विकास से जुड़ी योजनाओं की भारी कमी दिखाई देती है। हाल ही में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि यदि बड़े राजनीतिक दलों और नीति निर्माताओं के एजेंडे में खेल और एथलीटों का भविष्य शामिल नहीं होगा, तो आने वाली युवा प्रतिभाएं कैसे सामने आ सकेंगी और देश का नाम रोशन करेंगी।
बुनियादी ढांचे और नीतियों की दरकार
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश में विश्व स्तरीय एथलीट तैयार करने के लिए मजबूत जमीनी स्तर के बुनियादी ढांचे, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। जब तक नीतिगत दस्तावेजों में खेलों को उच्च प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक दूरदराज के इलाकों में छिपी हुई प्रतिभाओं को सही मंच और संसाधन मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है। खेल प्रेमियों और खेल संघों का कहना है कि घोषणा पत्रों में केवल सतही बातें करने के बजाय ठोस रणनीतियों का होना अनिवार्य है, ताकि युवाओं को करियर के रूप में खेल अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
भविष्य की तैयारियों को लेकर यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब खेल जगत में देश की भूमिका लगातार बढ़ रही है। खेल जानकारों का मानना है कि सरकारों और राजनीतिक दलों को अपने संकल्प पत्रों में खेल बजट में बढ़ोतरी, ग्रामीण क्षेत्रों में खेल अकादमियों की स्थापना और खिलाड़ियों के लिए सामाजिक सुरक्षा जैसी स्पष्ट घोषणाएं करनी चाहिए। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कई प्रतिभावान युवा संसाधनों के अभाव में आगे बढ़ने से वंचित रह जाएंगे।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या राजनीतिक दल खेल संगठनों और युवा वर्ग की इस मांग पर ध्यान देते हैं या नहीं। खेल समुदाय और जागरूक नागरिकों की ओर से यह लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि नीतिगत स्तर पर खेलों को एक मुख्य स्तंभ के रूप में मान्यता दी जाए। केवल बड़े आयोजनों के समय वादे करने से बात नहीं बनेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर एक मजबूत और स्थाई खेल संस्कृति विकसित करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं का होना अत्यंत आवश्यक है ताकि देश के हर कोने से नई खेल प्रतिभाएं उभरकर सामने आ सकें।